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वाराणसी

यूपी बोर्ड कार्यालय में बड़ा फर्जीवाड़ा! 40 हजार लेकर बदल दी छात्र की जन्मतिथि

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वाराणसी। यूपी बोर्ड  (UP Board) के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में बड़ा खुलासा सामने आया है। यहां एक छात्र की मार्कशीट में जन्मतिथि संशोधन के नाम पर 40 हजार रुपये रिश्वत लेने का मामला उजागर हुआ है। इतना ही नहीं, पदों का दुरुपयोग करते हुए गलत तरीके से जन्मतिथि में बदलाव भी कर दिया गया। यह संशोधन उप सचिव साहब सिंह यादव द्वारा किया गया, जबकि उन्हें इसका अधिकार भी नहीं था।

नियमों के अनुसार क्षेत्रीय कार्यालयों को केवल तीन वर्ष तक ही जन्मतिथि समेत अन्य संशोधन करने का अधिकार है। इसके बाद संशोधन का अधिकार प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड मुख्यालय के सचिव को होता है। संबंधित छात्र को जब मार्कशीट में गड़बड़ी की आशंका हुई तो उसने सीधे यूपी बोर्ड, प्रयागराज के सचिव से शिकायत कर दी।

अब क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी के प्रभारी अपर सचिव दिनेश सिंह ने इस मामले में उप सचिव साहब सिंह यादव, सहायक सचिव मनोज कुमार, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राणा प्रताप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार जायसवाल, प्रधान सहायक कन्हैया लाल और वरिष्ठ सहायक राहुल चौरसिया से स्पष्टीकरण मांगा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इन लोगों की मिलीभगत से पूरा खेल किया गया।

बताया गया कि विनोद राय अभी 12 दिन पहले ही क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। यह मामला उनके कार्यकाल का बताया जा रहा है। उनके कार्यकाल में ऐसी कई खामियां सामने आ रही हैं।

गोरखपुर निवासी अंकित कुमार ने अपनी जन्मतिथि संशोधन को लेकर वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन किया था। अंकित वर्तमान में काशी हिंदू विश्वविद्यालय का छात्र है। उसने यूपी बोर्ड, प्रयागराज को भेजे गए शिकायत पत्र में बताया कि उसने वर्ष 2014 में नीना थापा इंटर कॉलेज, गोरखपुर से हाईस्कूल परीक्षा पास की थी। उसे अपने प्रमाणपत्र में जन्मतिथि संशोधित करानी थी। इसके लिए वह कई बार क्षेत्रीय कार्यालय के चक्कर लगाता रहा।

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अंकित ने बताया कि एक दिन कार्यालय पहुंचने पर बाबू राहुल चौरसिया ने उससे कहा कि 40 हजार रुपये देने होंगे, तभी काम हो सकेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया प्रयागराज और फिर दिल्ली से पूरी होती है। अंकित के मुताबिक, उसे प्रमाणपत्र की जरूरत थी, इसलिए राहुल चौरसिया ने 40 हजार रुपये लेकर अगले ही दिन जन्मतिथि में संशोधन कर दिया। हालांकि, एक ही दिन में संशोधित मार्कशीट मिलने पर अंकित को संदेह हुआ और उसने इसकी शिकायत बोर्ड सचिव से कर दी।

स्पष्टीकरण में उप सचिव व अन्य को देना होगा जवाब

अपर सचिव की ओर से जारी स्पष्टीकरण पत्र में कहा गया है कि छात्र द्वारा प्रस्तुत स्थानांतरण प्रमाण-पत्र और अन्य अभिलेखों में विसंगतियां थीं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने संस्तुति करते हुए फाइल आगे बढ़ा दी। पत्रावली पर दर्ज टिप्पणियों में यह भी लिखा गया कि “मानवीय त्रुटि” के आधार पर संशोधन करना उचित प्रतीत होता है।

प्रथम दृष्टया जांच में अधिकारी व बाबूओं की मनमानी उजागर

जांच में पाया गया कि कार्यालय अभिलेखों में दर्ज टिप्पणियों और आदेशों के अनुपालन में कई प्रकार की विसंगतियां हैं। पत्रावली में दर्ज टिप्पणियों के अनुसार, जन्मतिथि संशोधन के लिए आवश्यक दस्तावेजों और जांच आख्या को लेकर अलग-अलग स्तर पर विरोधाभास सामने आए। कुछ आदेशों में वर्ष 1998 की जन्मतिथि संशोधित करने का निर्देश अंकित किया गया, जबकि पूर्व अभिलेखों में अलग तिथि दर्ज थी।

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मामले में यह भी सामने आया कि संबंधित पत्रावली में जांच समिति की रिपोर्ट संलग्न नहीं थी, जबकि आदेश उसी जांच आख्या के आधार पर पारित किए जाने का उल्लेख किया गया। इसके अलावा ओवरराइटिंग और हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठे हैं। जांच के दौरान यह भी पता चला कि कुछ अधिकारियों के हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं हैं, जबकि उनके नाम से आदेश दर्ज किए गए हैं।

कार्यालय की ओर से जारी पत्र में संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित तिथि तक अपना लिखित स्पष्टीकरण और साक्ष्य उपलब्ध कराएं। स्पष्ट किया गया है कि तय समय के भीतर जवाब नहीं मिलने पर यह माना जाएगा कि संबंधित पक्ष को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है, जिसके बाद विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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