गाजीपुर
समता पीजी कॉलेज में शोधार्थियों की प्री-सबमिशन मौखिकी संपन्न
हिंदी विभाग में डीआरसी बैठक आयोजित, शोध कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने पर दिया गया जोर
सादात (गाजीपुर)। नगर स्थित समता पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग में शुक्रवार को शोध गतिविधियों से जुड़े दो महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाविद्यालय के मल्टीपर्पज हॉल में दो शोधार्थियों की शोध-पूर्व मौखिकी (प्री-सबमिशन वाइवा-वोस) संपन्न हुई, वहीं विभागीय अनुसंधान समिति (डीआरसी) की बैठक में शोध संबंधी विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्री-सबमिशन मौखिकी में शोधार्थी निशा यादव ने ‘हिंदी उपन्यासों में आदिवासी जीवन’ विषय पर तथा अमित यादव ने ‘अमरकांत के कथा साहित्य में निम्न-मध्यवर्गीय जीवन’ विषय पर अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने दोनों शोधार्थियों के शोध कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें आवश्यक सुझाव दिए, जिससे वे अपने शोध प्रबंध को और अधिक प्रभावी बना सकें।
इस अवसर पर आयोजित विभागीय अनुसंधान समिति (डीआरसी) की बैठक में शोधार्थिनी पूनम यादव के फुलटाइम पीएचडी को पार्टटाइम पीएचडी में परिवर्तित किए जाने संबंधी आवेदन पर विचार करते हुए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई।

कार्यक्रम में प्राचार्य ने शोधार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शोध समाज और साहित्य के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह यादव ने शोध विषयों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए शोध के व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य अतिथि एवं बाह्य विषय विशेषज्ञ डॉ. चंद्रभान सिंह यादव, प्रोफेसर, हिंदी विभाग, के.जी.के. पीजी कॉलेज, मुरादाबाद ने दोनों शोध कार्यों की समीक्षा करते हुए शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने शोधार्थियों को मौलिकता, संदर्भों की प्रमाणिकता और विषय की गहनता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. जे.पी.एन. यादव, डॉ. जे.पी. यादव, डॉ. बलवंत, डॉ. अवनीश राय सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवाजी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
महाविद्यालय प्रशासन ने इसे अनुसंधान की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शोधार्थियों को अकादमिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
