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दमदार एक्टिंग, फीका क्लाइमैक्स! ‘एक दिन’ दर्शकों को कर देगी कन्फ्यूज

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मुंबई। आप जिसे दिल से चाहते हों, अगर वह आपको सिर्फ एक दिन के लिए मिल जाए तो क्या होगा? खासकर तब, जब वह आपका पहला प्यार हो। इसी भावनात्मक विषय पर आधारित है साई पल्लवी और जुनैद खान स्टारर फिल्म ‘एक दिन’, जो सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

हालांकि, फिल्म इस प्रेम और भावनाओं को उस गहराई से प्रस्तुत नहीं कर पाती, जिससे दर्शक पूरी तरह जुड़ सकें।फिल्म की कहानी नोएडा की माइकॉन डिजिटल कंपनी के आईटी विभाग में कार्यरत दिनेश कुमार श्रीवास्तव (जुनैद खान) के इर्द-गिर्द घूमती है। दिनेश बेहद संकोची स्वभाव का है और लोगों से नजर मिलाकर बात तक नहीं कर पाता।

वह अपनी सहकर्मी मीरा रंगनाथन (साई पल्लवी) से मन ही मन प्रेम करता है, लेकिन कभी अपने दिल की बात कह नहीं पाता।इस बीच उसे पता चलता है कि मीरा अपने बॉस नकुल (कुणाल कपूर) के साथ रिश्ते में है। शादीशुदा नकुल अपनी पत्नी से तलाक लेकर मीरा से शादी करने का वादा करता है। कंपनी को बड़ा मुनाफा होने पर पूरी टीम को पांच दिन के जापान भ्रमण पर ले जाया जाता है, क्योंकि मीरा की इच्छा जापान जाने की होती है।

जापान पहुंचने पर कहानी नया मोड़ लेती है। वहां एक रहस्यमयी घंटा है, जिसके बारे में कहा जाता है कि सच्चे दिल से उसे बजाकर मांगी गई इच्छा पूरी होती है। दिनेश मन ही मन कामना करता है कि काश मीरा एक दिन के लिए उसकी हो जाए। इसी दौरान नकुल की पत्नी वहां पहुंचकर बताती है कि वह चार महीने की गर्भवती है।

यह जानकर मीरा का दिल टूट जाता है। नशे की हालत में बर्फीले तूफान में फंसी मीरा को दिनेश स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाता है। वहां डॉक्टर बताती है कि मीरा को ट्रांजिएंट ग्लोबल अम्नेशिया (टीजीए) हो गया है, जिसमें व्यक्ति कुछ समय के लिए अपनी याददाश्त खो देता है। डॉक्टर के अनुसार उसकी याददाश्त अगले दिन लौट आएगी।इस एक दिन के दौरान, जब मीरा को अपने वर्तमान की कोई याद नहीं रहती, दिनेश उसके साथ जापान घूमता है और दोनों एक-दूसरे के करीब आते हैं।

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अगले दिन मीरा की याददाश्त लौट आती है। इसके बाद क्या वह दिनेश की कमी महसूस करती है, यही फिल्म का मुख्य आधार है।यह फिल्म 2016 की थाई फिल्म ‘वन डे’ की रीमेक है, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस के तहत बनाया गया है। सुनील पांडे के निर्देशन और स्नेहा देसाई व स्पंदन मिश्रा की लिखी कहानी में कई जगह भावनात्मक गहराई की कमी महसूस होती है।

दिनेश और मीरा के साथ बिताए गए दृश्य खिंचे हुए लगते हैं और क्लाइमैक्स भी जल्दबाजी में समाप्त होता नजर आता है।फिल्म में कई सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। जैसे मीरा को यह याद नहीं रहता कि वह जापान में है, लेकिन होटल का कमरा याद रहता है। वहीं नकुल के झूठ के पीछे की वजह भी स्पष्ट नहीं हो पाती।

हालांकि, इरशाद कामिल के गीत और राम संपत का संगीत फिल्म को मजबूती देते हैं। सिनेमेटोग्राफर मनोज लोबो ने जापान की खूबसूरती और वहां के पर्यटन स्थलों को शानदार तरीके से कैमरे में कैद किया है। अभिनय की बात करें तो साई पल्लवी ने हिंदी सिनेमा में अपने पदार्पण के साथ प्रभाव छोड़ा है। उन्होंने मीरा के किरदार को पूरी विश्वसनीयता के साथ निभाया है और अपनी डांस प्रतिभा भी दिखाई है।

वहीं जुनैद खान रोमांटिक और भावनात्मक दृश्यों में अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते। कुणाल कपूर भी अपनी भूमिका में खास असर नहीं छोड़ते।कुल मिलाकर ‘एक दिन’ एक साफ-सुथरी और सादगी भरी प्रेम कहानी है, लेकिन यह उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाती, जहां यह दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बना सके।

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