पूर्वांचल
देवरिया में भवन मानचित्र स्वीकृति से पहले एनओसी अनिवार्य, आवेदक परेशान
विभागों की ढिलाई से अटकी मानचित्र स्वीकृति, लोग लगा रहे चक्कर
देवरिया में महायोजना 2031 के अंतर्गत भवन निर्माण की प्रक्रिया अब और जटिल हो गई है। नई व्यवस्था के अनुसार, किसी भी भवन का मानचित्र स्वीकृत कराने से पहले संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, विभिन्न विभागों की सुस्ती और टालमटोल के चलते आवेदकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नई उपविधि के तहत भूखंड स्वामी को स्वयं संबंधित विभागों से संपर्क कर एनओसी प्राप्त करनी होगी। तहसील और नगर पालिका परिषद से एनओसी लेना सभी आवेदकों के लिए जरूरी है। इन प्रमाण पत्रों के प्राप्त होने के बाद ही विनियमित क्षेत्र के नियत प्राधिकारी कार्यालय में मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया जा सकेगा। लेकिन उपविधि लागू होने के बाद प्रक्रिया जटिल हो गई है और विभागीय ढिलाई के कारण स्वीकृति में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
शहर के कसया रोड गरुलपार निवासी राम पराहू ने नगर पालिका परिषद और सदर तहसील में मानचित्र स्वीकृति के लिए आवेदन किया है, लेकिन उन्हें अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है। इसी तरह न्यू कॉलोनी के भानु प्रताप सिंह, रसना तथा महातम यादव भी एनओसी के लिए लगातार विभागों के चक्कर काट रहे हैं।
उप्र विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 के अनुसार नगर पालिका परिषद को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रस्तावित निर्माण से सड़क प्रभावित नहीं होगी, जबकि तहसील प्रशासन को भूमि अभिलेखों के अनुरूप होने की पुष्टि करनी होगी। यदि भूखंड किसी सरकारी विभाग की भूमि से सटा हुआ है, तो उस विभाग से भी एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
इसके अतिरिक्त, 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवन या 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण के लिए अग्निशमन विभाग की अनुमति आवश्यक होगी। वहीं, रेलवे ट्रैक या जेल से 30 मीटर के भीतर निर्माण के लिए संबंधित विभाग से विशेष अनुमति लेनी होगी।
नियत प्राधिकारी एवं एसडीएम सदर सीमा पांडेय ने बताया कि इस संबंध में सभी विभागों को पत्र भेजकर एनओसी जारी करने के प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी, ताकि प्रक्रिया को सुचारु बनाया जा सके।
