गोरखपुर
रेलवे में नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, बर्खास्त रेलकर्मी पर केस
गोरखपुर। रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में एक बर्खास्त रेलकर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यांत्रिक कारखाना गोरखपुर के वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी की तहरीर पर शाहपुर थाना पुलिस ने दीपक कुमार सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस मामले से जुड़े बैंक खातों, ऑनलाइन लेन-देन और कथित भर्ती प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित ने यांत्रिक कारखाने में इंटरव्यू कराने के नाम पर युवाओं से पांच हजार से दस हजार रुपये तक वसूले थे।
जानकारी के अनुसार 23 और 24 मई को विभिन्न जिलों से करीब 70 युवक रेलवे यांत्रिक कारखाना परिसर में इंटरव्यू देने पहुंचे थे। उनके पास नियुक्ति और इंटरव्यू से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद थे। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के पहुंचने पर कारखाना प्रशासन को संदेह हुआ, क्योंकि रेलवे की ओर से ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया संचालित नहीं की जा रही थी।
अधिकारियों की पूछताछ में पता चला कि सभी अभ्यर्थियों को एक ही माध्यम से इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि रेलवे से बर्खास्त कर्मचारी दीपक Kumar Singh ने सोशल मीडिया के जरिए रेलवे भर्ती का कथित विज्ञापन प्रसारित किया था।
आरोप है कि दीपक कुमार सिंह स्वयं को रेलवे से जुड़ा अधिकारी बताकर युवाओं को नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। इसके बदले पंजीकरण, टूल्स किट, मेडिकल परीक्षण और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर रकम वसूलता था। भुगतान के लिए अभ्यर्थियों को क्यूआर कोड भेजा जाता था और रुपये जमा होने के बाद उन्हें इंटरव्यू कॉल लेटर समेत अन्य दस्तावेज भेजकर यांत्रिक कारखाना पहुंचने को कहा जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 60 से 70 युवक उसके झांसे में आ चुके हैं और ऑनलाइन भुगतान कर चुके हैं। पुलिस का कहना है कि ठगी का वास्तविक दायरा और वसूली गई कुल रकम जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि फर्जी भर्ती का विज्ञापन 20 मई से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा था। मामला सामने आने के बाद यांत्रिक कारखाना प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी पाई गई। रेलवे प्रशासन को भी ऐसी किसी भर्ती की जानकारी नहीं थी।
मामले में दीपक कुमार सिंह की भूमिका सामने आने के बाद वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी ने शाहपुर थाने में तहरीर दी। इसके बाद कारखाना प्रशासन ने जागरूकता अभियान चलाते हुए परिसर और अन्य प्रमुख स्थानों पर चेतावनी संबंधी पंपलेट चस्पा कराए तथा लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
जांच में यह भी सामने आया कि दीपक कुमार सिंह पहले आलमबाग कार्यशाला में तैनात रह चुका है और नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। आरोप है कि वह अपने पुराने पहचान पत्र, अभिलेखों और मोबाइल नंबरों का हवाला देकर युवाओं को विश्वास में लेता था। विज्ञापन में जारी मोबाइल नंबरों के जरिए वह अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें भर्ती का झांसा देता था।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित फर्जी भर्ती गिरोह में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
