मिर्ज़ापुर
हरी खाद से राजगढ़ के किसान संवार रहे मिट्टी की सेहत
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घट रही
ढैंचा की खेती से बढ़ रही उर्वरता और उत्पादन, कृषि विभाग किसानों को कर रहा जागरूक
राजगढ़ (मिर्जापुर)। खेती में नई तकनीक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए राजगढ़ विकासखंड क्षेत्र के किसान अब हरी खाद (ढैंचा) का प्रयोग कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे जहां खेतों की सेहत में सुधार हो रहा है, वहीं फसलों के उत्पादन में भी वृद्धि देखने को मिल रही है।
राजकीय बीज भंडार, राजगढ़ ब्लॉक की ओर से किसानों को निःशुल्क ढैंचा बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। किसान इससे हरी खाद तैयार कर खेतों में प्रयोग कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ रही है और डीएपी व यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो रही है।
किसानों को मिल रहा बेहतर परिणाम
क्षेत्र के लूसा गांव के किसान अश्विनी सिंह सहित निकरीका और धनसरिया क्षेत्र के कई किसान हरी खाद का प्रयोग कर लाभ उठा रहे हैं। किसानों का कहना है कि ढैंचा की हरी खाद खेतों की उर्वर शक्ति बढ़ाने के साथ फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार कर रही है।
किसानों के अनुसार हरी खाद के प्रयोग से भूमि की नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ती है और खेती की लागत में भी कमी आती है।
कृषि विभाग चला रहा जागरूकता अभियान
हरी खाद के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है। एडीओ (कृषि) संतोष कुशवाहा, तकनीकी सहायक विकास पाल, विवेकानंद सहित कृषि विभाग की टीम पिछले एक वर्ष से गांव-गांव पहुंचकर किसानों को हरी खाद के फायदे बता रही है।
विभाग किसानों को जैविक और टिकाऊ खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहे।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हरी खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने से मिट्टी की उर्वर शक्ति कायम रहती है, रासायनिक खादों की जरूरत कम होती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है। राजगढ़ क्षेत्र में किसानों की यह पहल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
