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वाराणसी

गर्मी का खौफनाक असर, मोर्चरी में बढ़ीं लावारिस लाशें

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वाराणसी। जिले में भीषण गर्मी का असर लगातार देखने को मिल रहा है। शहर का तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसी बीच लावारिस शवों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल की मोर्चरी में बीते तीन दिनों के भीतर 7 लावारिस शव रखे गए थे, जिन्हें अलग-अलग इलाकों से ब्रॉट डेड या इलाज के दौरान मौत होने के बाद लाया गया था। वहीं शिवपुर मोर्चरी में भी 6 शव रखे गए हैं। कबीरचौरा में रखे गए 3 शवों की 48 घंटे बाद पहचान हो गई, जबकि 4 शव अब भी लावारिस हैं।

वाराणसी की प्रमुख मोर्चरी कबीरचौरा में 25 शव सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर की व्यवस्था की गई है। फिलहाल यहां लावारिस शवों को संरक्षित रखा जा रहा है। गर्मी के कारण शवों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हालांकि इन सभी मौतों की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वहीं शिवपुर मोर्चरी में भी बीते सप्ताह के दौरान लावारिस शवों की संख्या बढ़ी है।

मोर्चरी की देखरेख करने वाले भोला ने बताया कि इस समय गर्मी बेहद तेज पड़ रही है। कई लोग पानी के अभाव में तड़पकर दम तोड़ दे रहे हैं। इसके अलावा मानसिक रूप से अस्वस्थ और भीख मांगने वाले लोगों की भी मौत हो रही है। ऐसे मामलों की सूचना मिलने पर शवों को यहां लाकर मोर्चरी में रखा जाता है। सुरेश ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते हाल के दिनों में शवों का आना बढ़ गया है। फिलहाल यहां 4 लावारिस शव रखे गए हैं, जिनके परिजन या वारिसों का अब तक पता नहीं चल सका है। सामान्य दिनों में एक या दो शव आते हैं, लेकिन लावारिस शवों की संख्या कम रहती है।

कबीरचौरा और शिवपुर की मोर्चरी में रखे शवों की मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल नौतपा के दौरान हीटवेव का अलर्ट जारी है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वाराणसी में अब तक हीटवेव का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।

लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का नियम यह है कि 72 घंटे तक शव को सुरक्षित रखा जाता है। इस दौरान शव की पहचान और उसके वारिसों का पता लगाने के लिए सभी थानों को सूचना भेजी जाती है। शव की तलाशी के आधार पर उसकी जाति का पता लगाया जाता है और उसी अनुसार अंतिम संस्कार कराया जाता है। कई मामलों में परिजन मिल जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में पुलिस को हरिश्चंद्र घाट पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराना पड़ता है।

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