वाराणसी
ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ : राजकुमार गुप्ता
वाराणसी। एक तरफ जहां ग्राम प्रधान को प्रशासक नियुक्त होने और कार्यकाल बढ़ाये जाने को लेकर प्रसन्न है। प्रदेश सरकार को बधाई पत्र लिख रहे हैं वही ग्राम पंचायत में अपने लिए ग्राम प्रधान पद का चुनाव लड़ने वाले भावी प्रत्याशी लोग इसका विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र में एक नियत समय के लिए जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं। समय से पूर्व राष्ट्रपति शासन लागू करके सरकारों को हटाना और तथा अनियमित तरीके से समय बढ़ाना दोनों लोकतंत्र के लिए घातक है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजातालाब राजकुमार गुप्ता कहते हैं कि चुनाव लोकतंत्र में समय से होने चाहिए। इस तरह का कृत्य लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ जैसा है। कहां की हर नागरिक को 5 साल बाद अपने जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला है जिसे प्रदेश सरकार ने छीन लिया है।
बेनीपुर ग्राम सभा के निवासी पूर्व प्रधान मुहम्मद अनवर भी सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह प्रधान पद के लिए तैयारी कर रहे थे। समय से चुनाव कराने की जगह सरकार ग्राम प्रधानों को खुश करने के चक्कर में लगी है जबकि गांव की जनता ग्राम प्रधानों को हटाना चाहती है। प्रदेश में जितनी संख्या में ग्राम प्रधान हैं उससे कई गुना प्रधान पद के भावी प्रत्याशी है जो इस निर्णय से दुखी हैं।
बुढ़ापुर के राधे श्याम यादव कहते हैं की ऐसा करने से वंचित वर्ग को अपना अधिकार भी नहीं मिल पाएगा। समय से चुनाव होता तो तमाम गांव में महिला सीट आरक्षित होती तथा वंचित वर्ग के लिए भी सीटें आरक्षित होती। सबका अधिकार पीछे धकेल दिया गया है।
बीरभानपुर के विजय ने कहां की सरकार ने यह अच्छा निर्णय नहीं लिया है। गांवों के तमाम युवा ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे जिनके मन में गांव में अच्छा करने का संकल्प था। प्रशासकों के अधिकार सीमित है ऐसे में गांव में विकास की रफ्तार भी धीमी रहेगी।
