गाजीपुर
आईटीबीपी जवान जितेंद्र यादव को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई
भांवरकोल (गाजीपुर) जयदेश। स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सजना के राजस्व गांव सलारपुर (अजईपुर) निवासी तथा आईटीबीपी में कार्यरत 38 वर्षीय जवान स्वर्गीय जितेंद्र यादव पुत्र जमुना सिंह यादव का अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर लोहारपुर स्थित योगी बीर गंगा घाट पर गमगीन माहौल में किया गया। छठवीं बटालियन छपरा के इंस्पेक्टर जीडी सूर्यनाथ सिंह के नेतृत्व में पंद्रह जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद उनके सात वर्षीय पुत्र निर्भय सिंह यादव ने मुखाग्नि दी।

बताते चलें कि अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदार स्वर्गीय जितेंद्र यादव बीते महीने 23 अप्रैल को अवकाश लेकर गांव आए थे। अगले दिन शाम के समय किसी आवश्यक कार्य से वह अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से कहीं जाने के लिए निकले थे। अभी वह करीब दो सौ मीटर ही आगे बढ़े थे कि दुर्भाग्यवश उनकी मोटरसाइकिल के सामने एक नीलगाय आ गई, जिससे टकराकर वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जाता है कि इस हादसे में उनके सिर और पैर में गंभीर चोटें आई थीं। आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए वाराणसी ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां करीब दस दिनों तक उनका इलाज चला। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वह गांव वापस आ गए थे और दवा चल रही थी।

परिवार वालों के अनुसार, 7 मई 2026 को अपने ससुराल में आयोजित तिलकोत्सव में शामिल होने के लिए वह 4 मई को बलिया गए थे। उन्हें क्या पता था कि वह हमेशा के लिए घर छोड़कर जा रहे हैं। ससुराल पहुंचते ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए बलिया सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और उपचार के दौरान ही उनका निधन हो गया। नियमानुसार उनका पोस्टमार्टम वहीं कराया गया।
मंगलवार दोपहर उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया। असामयिक निधन से गांव और ससुराल की सारी खुशियां मातम में बदल गईं। दोनों स्थानों पर कोहराम मच गया। उनकी पत्नी पुष्पा यादव का करुण क्रंदन देखकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही थीं। लोगों ने बताया कि जितेंद्र यादव बेहद मिलनसार और सामाजिक स्वभाव के व्यक्ति थे। अवकाश पर गांव आने के दौरान वह अपने शुभचिंतकों से लगातार मिलते-जुलते रहते थे। कुल मिलाकर सलारपुर (अजईपुर) की माटी ने आज अपने ऐसे लाल को खो दिया, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। मृतक अपने पीछे पत्नी और एक छोटे पुत्र को छोड़ गए हैं।
