वाराणसी
अज्ञातवास के बाद भक्तों को हुए भगवान जगन्नाथ के दर्शन, असि मंदिर में उमड़ी आस्था
मंगला आरती के साथ खुले मंदिर के कपाट, ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंजा परिसर
15 जुलाई को निकलेगी डोली यात्रा, 16 जुलाई से शुरू होगा काशी का ऐतिहासिक तीन दिवसीय रथयात्रा मेला
वाराणसी। काशी के असि स्थित प्राचीन भगवान जगन्नाथ मंदिर में एक पखवाड़े के अज्ञातवास के बाद मंगलवार को भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा ने भक्तों को पुनः दर्शन दिए। सुबह पांच बजे मंगला आरती के साथ मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के स्नानोत्सव के बाद भगवान को अस्वस्थ मानते हुए मंदिर के कपाट लगभग 15 दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे। इसे भगवान के विश्राम और स्वास्थ्य लाभ का समय माना जाता है। आषाढ़ी अमावस्या के अवसर पर मंदिर के पट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
मंगला आरती के बाद श्वेत वस्त्रों से सुसज्जित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रह बेला, चमेली और तुलसी की सुगंधित मालाओं से अलंकृत दिखाई दिए। श्रद्धालुओं ने पुष्प, फल, मिष्ठान अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की तथा भगवान को परवल का पथ्य भोग अर्पित कर चरणामृत ग्रहण किया।
मंदिर के पुजारी राधेश्याम ने बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महाअभिषेक एवं स्नान के बाद भगवान के अस्वस्थ होने की मान्यता के चलते मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं। आषाढ़ी अमावस्या की सुबह पुनः दर्शन शुरू हुए। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे तक दर्शन होंगे, इसके बाद मंदिर बंद रहेगा और अपराह्न तीन बजे से पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
15 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की डोली यात्रा
काशी में पुरी की तर्ज पर रथयात्रा की बजाय भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक डोली यात्रा निकाली जाती है। इस वर्ष 15 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर शाम चार बजे असि स्थित मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की डोली यात्रा निकलेगी। यात्रा असि चौराहा, पद्मश्री चौराहा, नवाबगंज, कश्मीरीगंज राम मंदिर, शंकुलधारा स्थित द्वारिकाधीश मंदिर और बैजनत्था मंदिर होते हुए रथयात्रा स्थित बेनीराम का बगीचा (शाहपुरी निवास) पहुंचेगी।
16 जुलाई से लगेगा ऐतिहासिक रथयात्रा मेला
डोली यात्रा के बाद भगवान के विग्रहों को 16 जुलाई की भोर में पारंपरिक रूप से रथयात्रा स्थल स्थित निराला निवास में विराजमान कराया जाएगा। इसके साथ ही काशी का विश्वप्रसिद्ध तीन दिवसीय रथयात्रा मेला शुरू होगा। इस ऐतिहासिक मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और काशी की प्राचीन धार्मिक परंपरा के साक्षी बनते हैं।
