वाराणसी
‘लिखना शिक्षा की सबसे बड़ी विधा’, प्रो. अवध ओझा ने छात्रों को दिए सफलता के मंत्र
बनारस पब्लिक स्कूल में मोटिवेशनल सत्र, पढ़ाई के साथ लेखन और मनन पर दिया जोर
पिंडरा (वाराणसी)। मोटिवेशनल स्पीकर एवं पतंजलि प्रशासनिक सेवा अकादमी के अध्यक्ष प्रो. अवध ओझा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में विवेक और सही सोच का विकास करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पढ़ने के साथ-साथ लिखने की आदत विकसित करें, क्योंकि “लिखना शिक्षा की सबसे बड़ी विधा है।”
शुक्रवार को बरजी स्थित बनारस पब्लिक स्कूल में आयोजित मोटिवेशनल सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. ओझा ने कहा कि बिना सोचे पढ़ा जा सकता है, लेकिन बिना सोचे लिखा नहीं जा सकता। लेखन से विषय का मनन होता है और उस पर मजबूत पकड़ बनती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में दुख कम और चुनौतियां अधिक होती हैं। जो व्यक्ति चुनौतियों का सामना करना सीख लेता है, वही सफलता हासिल करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के चार महत्वपूर्ण चरण—मनन (समझ), लेखन, चर्चा और विद्यादान—के बारे में बताते हुए कहा कि यही प्रक्रिया ज्ञान को स्थायी बनाती है और अच्छे संस्कारों का निर्माण करती है।
प्रो. ओझा ने छात्रों की जिज्ञासाओं का उदाहरणों के साथ समाधान किया और कहा कि जिस विषय में कमजोरी महसूस हो, उसे नियमित रूप से लिखना शुरू कर दें, उस विषय पर पकड़ स्वतः मजबूत हो जाएगी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से प्रश्न भी पूछे और सही एवं बेबाक उत्तर देने वाले छात्रों को नगद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया।
