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गोरखपुर

गोलघर की विवादित जमीन पर फिर बैठक, दो फ्लैट और प्रतिमा भूमि का प्रस्ताव

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केदारनाथ सिंह की प्रतिमा पर विवाद गहराया, प्रशासन कर रहा मध्यस्थता

गोरखपुर। गोलघर स्थित चर्चित जमीन का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस विवाद को सुलझाने हेतु कमिश्नर और जिलाधिकारी की मौजूदगी में बैठक आयोजित हुई। बैठक में उद्यमी की ओर से प्रस्ताव दिया गया कि सैंथवार समाज को थ्री बीएचके के दो फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही स्व. केदारनाथ सिंह की प्रतिमा के लिए 800 वर्ग फीट भूमि का ऑफर भी रखा गया।

अधिकारियों ने प्रस्ताव पर स्व. केदारनाथ सिंह के परिवार की राय जानी, जिस पर डॉ. आशीष सिंह ने कहा कि उन्हें उद्यमी से कुछ नहीं चाहिए। वे कोई लाभ नहीं लेंगे, बस बाबूजी के सम्मान हेतु उचित व्यवस्था की जाए।

विवाद की पृष्ठभूमि

पार्क रोड स्थित नजूल भूमि पर पूर्व विधायक स्व. केदारनाथ सिंह किराएदार के रूप में रहते थे। बाद में उक्त भूमि को उद्यमी अवधेश श्रीवास्तव एवं समीर अग्रवाल ने फ्री होल्ड करा लिया। इस कार्यवाही के विरोध में स्व. केदारनाथ सिंह न्यायालय पहुंचे। मामले की सुनवाई के दौरान ही उनका निधन हो गया, जिसके बाद बड़े पुत्र अजय सिंह मुकदमे को आगे बढ़ाते रहे।

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यह मामला हाईकोर्ट से उद्घोषित होता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उद्यमी के पक्ष में निर्णय देते हुए भूमि खाली कराने का आदेश दिया। आदेश लागू करने के दौरान भारी विरोध हुआ, क्योंकि उसी स्थान पर स्व. केदारनाथ सिंह की प्रतिमा भी स्थापित है। सैंथवार समाज ने प्रतिमा हटाए जाने का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में परिवार ने आवास खाली कर दिया, किंतु प्रतिमा को लेकर विवाद बरकरार रहा। उद्यमी पक्ष ने जमीन का कब्जा ले लिया है, जबकि प्रतिमा के सम्मानजनक स्थान हेतु भाजपा के सैंथवार नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संपर्क किया। मुख्यमंत्री ने विवाद निपटाने के निर्देश दिए, जिसके बाद प्रशासन की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच वार्ता आगे बढ़ी।

सपा प्रतिनिधिमंडल का दौरा दो बार टला

इस प्रकरण में समाजवादी पार्टी ने भी सक्रियता दिखाई। स्व. केदारनाथ सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण हेतु दो बार उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल घोषित किया गया, किंतु दोनों ही मौकों पर आगमन से एक दिन पूर्व दौरा निरस्त हो गया। इस बीच डॉ. आशीष कुमार सिंह लगातार इस मुद्दे पर मुखर बने हुए हैं।प्रशासन अब दोनों पक्षों की सहमति से समाधान खोजने की दिशा में प्रयासरत है।

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