वाराणसी
ज्ञानवापी बवाल मामले में भाजपा नेताओं समेत सभी 14 आरोपी दोषमुक्त
2005 के चर्चित प्रकरण में एमपी-एमएलए कोर्ट का फैसला
वाराणसी। ज्ञानवापी क्षेत्र में वर्ष 2005 में हुए चर्चित बवाल और दंगा मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले में वरिष्ठ भाजपा नेताओं सहित कई स्थानीय व्यापारियों को आरोपी बनाया गया था।
जुमे की नमाज के दौरान हुआ था विवाद
प्रकरण 2 सितंबर 2005 का है। आरोपों के अनुसार जुमे की नमाज के दौरान मौलाना बातिन की जांच को लेकर शुरू हुई कहासुनी ने बाद में तनावपूर्ण स्थिति का रूप ले लिया था। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आई थी।
इसके बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कई लोगों को नामजद किया था।
राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में फंसाने का आरोप
मामले में आरोपी बनाए गए लोगों का कहना था कि उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के चलते मुकदमे में शामिल किया गया। न्यायालय में सुनवाई के दौरान लंबे समय तक साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई।
21 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया
करीब दो दशक से अधिक समय तक चले इस मुकदमे में विभिन्न स्तरों पर सुनवाई होती रही। अंततः एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद सभी 14 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
मामले में आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता गुलाम गौश खान और आशिफ उमर भी न्यायालय में उपस्थित रहे और पक्ष रखा।
फैसले के बाद राहत
न्यायालय का निर्णय आने के बाद सभी आरोपियों और उनके समर्थकों ने राहत व्यक्त की। लंबे समय से लंबित इस मामले में आए फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
