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25 हजार का इनामी‌ टप्पेबाज गिरफ्तार, पुलिस को 12 राज्यों तक दौड़ाया

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कानपुर। अमिताभ बच्चन की मशहूर फिल्म डॉन का एक मशहूर डायलॉग था, जो आज भी सिनेमा प्रेमियों के जुबान पर है है। “डॉन का इंतजार तो 11 मुल्कों की पुलिस कर रही है, लेकिन डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।”

शहर में पकड़े गए एक टप्पेबाज ने तो पुलिस को 12 राज्यों तक दौड़ा डाला। करीब 2 महीने तक इस शहर से उस शहर की खाक छानने के बाद पुलिस ने रविवार सुबह उसे मुरे कंपनी पुल के पास आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी सुनील के पास से छह आधार कार्ड, 4090 रुपये, एक तमंचा, कारतूस, डीएल, एक निर्वाचन कार्ड, प्रेस आईडी, चार एटीएम कार्ड, पांच सिम और बाइक बरामद किया है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी सुनील अब तक 1200 से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। उसके खिलाफ 18 राज्यों में दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज है और वह जबलपुर में चार साल की जेल भी काट चुका है। वह मूल रूप से मिर्जापुर जिले का रहने वाला है।

डीसीपी पूर्वी एसके सिंह ने हरबंस मोहाल थाने में प्रेसवार्ता कर बताया कि, पांच मई को थाने में मुजफ्फरपुर बिहार निवासी एक CRPF कर्मी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उसने बताया बताया था कि- एक युवक ने ट्रेन में दोस्ती की। इसके बाद हरबंसमोहाल के होटल सनराइज गैलेक्सी में ले गया। मौका पाते ही उनके 2.50 लाख रुपये, पासपोर्ट, एटीएम आदि लेकर भाग गया। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा।

खास बात यह है कि वह खुद को फौजी बताकर फौजियों को ही निशाना बनाता था। इसके लिए वह अक्सर ट्रेन में यात्रा करता और फौजियों से दोस्ती बनाता। इसलिए हमने प्लानिंग करके पुलिसकर्मियों को सेना की वर्दी पहनाकर आरोपी को पकड़ने का जाल बिछाया गया, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली। इस बीच आरोपी ने कलक्टरगंज में एक और वारदात को अंजाम दे डाला। हालांकि यहां लगे कैमरों से उसके फुटेज मिले। होटल में जमा की गई आईडी से पता चला कि वह मिर्जापुर निवासी सुनील दुबे उर्फ लल्लू है। डीसीपी के मुताबिक सर्विलांस टीम को लगाकर पुलिस ने करीब 12 राज्यों तक उसका पीछा किया, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो जाता।

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डीसीपी पूर्वी के मुताबिक आरोपी बड़ा शातिर है। वह अपने घर बहुत कम जाता था। एक पड़ोसी को अक्सर फोन कर घर वालों से बात करता था। उस पड़ोसी का नंबर सर्विलांस पर लगाया गया। आखिरी बार जब आरोपी सुनील ने घर में बात की तो सर्विलांस से पता चला कि वह मुरे कंपनी पुल के पास है। इसी सुराग के आधार पर उसे पकड़ लिया गया। दोपहर बाद कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

पुलिस टीम करीब दो महीने तक सुनील दुबे को दबोचने के लिए पीछा करती रही। बिहार के पटना, गया, पश्चिम बंगाल के कोलकाता समेत कई प्रदेशों और जिलों की खाक छानी। सुनील के लगातार मोबाइल और नंबर बदलने की वजह से पुलिस गच्चा खा जाती थी। इस दौरान उसने ट्रेन में यात्रा कर रहे एक फौजी के साढ़े पांच लाख रुपये पार दिए थे। आरोपी के मुताबिक इन रुपयों से वह वाराणसी में कार खरीदने की तैयारी कर रहा था

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