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गोरखपुर

शिक्षा और समाजसेवा की अनूठी मिसाल बने पं. हरिनारायण शर्मा

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वेदरत्न विद्यालय गुरुकुल की समृद्ध परंपरा और उनके योगदान को सामने लाने की पहल

खगौल। वेदरत्न विद्यालय गुरुकुल, मुस्तफापुर, खगौल से जुड़ी पं. हरिनारायण शर्मा की शैक्षणिक, सामाजिक और राष्ट्रीय गतिविधियों को लेकर उपलब्ध सामग्री में उनके योगदान का विस्तृत उल्लेख मिलता है। शिक्षा, समाज सुधार, आयुर्वेद और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

शिक्षा के प्रसार को बनाया जीवन का उद्देश्य

पं. हरिनारायण शर्मा ने शिक्षा को समाज के विकास का प्रमुख आधार माना। उनके प्रयासों से स्थापित वेदरत्न विद्यालय गुरुकुल में शिक्षा के साथ संस्कार, नेतृत्व प्रशिक्षण, योग, विज्ञान, गणित, आयुर्वेद और अन्य विषयों पर अध्ययन की व्यवस्था की गई। गुरुकुल को आधुनिक शिक्षा और भारतीय परंपरा के समन्वय के केंद्र के रूप में विकसित किया गया।

स्वतंत्रता आंदोलन और समाज सुधार में सक्रिय भूमिका

गुरुकुल से जुड़े इतिहास में स्वतंत्रता आंदोलन और समाज सुधार गतिविधियों का भी उल्लेख मिलता है। पं. हरिनारायण शर्मा ने सामाजिक कुरीतियों, छुआछूत और जातिगत भेदभाव का विरोध किया तथा विधवा विवाह जैसी सामाजिक सुधार की पहल का समर्थन किया। उनके संपर्क में देश की अनेक प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां भी आती रहीं।

शिक्षा संस्थानों के विकास में रहा योगदान

पं. हरिनारायण शर्मा और उनके सहयोगियों के प्रयासों से विभिन्न स्थानों पर विद्यालय, गुरुकुल तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के विकास को गति मिली। गुरुकुल के उच्च शिक्षा विभाग को बाद में देवघर स्थानांतरित किए जाने का भी उल्लेख मिलता है, जहां गुरुकुल महाविद्यालय बैद्यनाथधाम के रूप में शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार हुआ।

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आयुर्वेद और पत्रकारिता से भी रहा जुड़ाव

शिक्षा के साथ पं. हरिनारायण शर्मा ने आयुर्वेद और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया। उनके प्रयासों से आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं शिक्षा केंद्र संचालित किए गए। साथ ही पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन के माध्यम से सामाजिक और शैक्षणिक विचारों को लोगों तक पहुंचाने का कार्य भी किया गया।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी विरासत

पं. हरिनारायण शर्मा की विरासत को आगे बढ़ाने में उनके परिवार की अगली पीढ़ियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पुत्र पं. वेद व्रत शर्मा शिक्षाविद, इतिहासकार और पत्रकार रहे, जबकि पं. सत्य व्रत शर्मा तथा पं. प्रिय व्रत शर्मा ने साहित्य और आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। वेदरत्न विद्यालय गुरुकुल से जुड़ी यह परंपरा आज भी शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत मानी जाती है।

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