मिर्ज़ापुर
मां विंध्यवासिनी के दरबार में गूंजे शास्त्रीय संगीत के सुर
‘परम्परा’ समारोह में कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां, वरिष्ठ पत्रकार सलिल पांडेय को मिला ‘परम्परा सम्मान’
विंध्याचल/मीरजापुर। आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी के पावन धाम में भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और कला की मनोहारी प्रस्तुतियों ने देर रात तक श्रोताओं को भाव-विभोर किए रखा। ‘महेश्वर साधना ललित कला प्रशिक्षण केन्द्र’ की ओर से विन्ध्य रत्न स्मृतिशेष पं. महेश्वरपति त्रिपाठी के जन्मोत्सव के अवसर पर नौवें शास्त्रीय संगीत समारोह ‘परम्परा’ का भव्य आयोजन मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर में किया गया।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां विंध्यवासिनी की वंदना के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि वाणिज्य कर विभाग (सीजीएसटी) के डिप्टी कमिश्नर मनोज कुमार सिन्हा ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस अवसर पर भारतीय सनातन संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता में योगदान के लिए वरिष्ठ पत्रकार एवं आध्यात्मिक लेखक सलिल पांडेय को ‘परम्परा सम्मान’ से अलंकृत किया गया। आयोजकों और अतिथियों ने उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह में काशी की सुप्रसिद्ध गायिका अलंकृता रॉय ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। वहीं डॉ. संगीता सिंह और श्रेया मिश्रा के सितार वादन तथा सुधीर गौतम की बांसुरी की जुगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बनारस घराने के तबला सम्राट पद्म विभूषण पं. किशन महाराज के सुपुत्र एवं समारोह के संरक्षक पं. पूरण महाराज और उनकी पुत्री अवंतिका महाराज ने तबला-पखावज की जुगलबंदी प्रस्तुत की। थाप, तिहाई और परनों की प्रस्तुति पर पूरा प्रांगण तालियों से गूंज उठा।
नृत्य प्रस्तुतियों में वारन्या सिन्हा ने कथक की प्रस्तुति दी। रविशंकर मिश्र और डॉ. ममता टंडन के युगल कथक ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। वहीं कोलकाता से आईं आद्रिजा कुंडू ने ओडिसी नृत्य के माध्यम से अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में पं. गौरव मिश्र, डॉ. रजनीश तिवारी, देव नारायण और मोहित साहनी ने संगत की। मंच संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। संस्था के व्यवस्थापक दिनेश्वरपति त्रिपाठी, अध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्र और सचिव विंध्यवासिनी प्रसाद केसरवानी ने अतिथियों, कलाकारों और श्रोताओं के प्रति आभार जताया। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कला प्रेमी मौजूद रहे।
