जौनपुर
वननेस वन : प्रकृति के साथ समरसता का जन आंदोलन
हरित भविष्य की ओर संत निरंकारी मिशन की अनूठी पहल, 23 अगस्त को देशभर में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
जौनपुर, 20 अगस्त 2026। बाबा हरदेव सिंह जी का दिव्य संदेश—‘प्रदूषण अंदर हो या बाहर, दोनों ही हानिकारक हैं’—केवल पर्यावरण संरक्षण का आह्वान नहीं, बल्कि मानवीय चेतना को निर्मल बनाने और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी बनने की प्रेरणा भी है। इसी संदेश को साकार रूप देते हुए संत निरंकारी मिशन अपनी पर्यावरण संरक्षण पहल ‘वननेस वन-प्रकृति के साथ समरसता’ के माध्यम से हरित, संतुलित और सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन आशीर्वाद से अगस्त 2021 में शुरू हुई यह पहल आज देशव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। इसका उद्देश्य केवल वृक्षारोपण करना नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध को मजबूत करना, पर्यावरण संरक्षण को जीवन-मूल्य के रूप में स्थापित करना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और संतुलित पृथ्वी का निर्माण करना है।
संत निरंकारी मंडल के सचिव श्री जोगिंदर सुखीजा के अनुसार, देश के विभिन्न राज्यों में अब तक लगभग 350 वृक्ष समूह स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 600 से अधिक ‘वननेस वन’ स्थलों पर श्रद्धालु और सेवादार पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन में जुटे हुए हैं। यह अभियान वृक्ष लगाने के साथ-साथ समाज में पर्यावरणीय जागरूकता, संवेदनशीलता और सामूहिक सहभागिता की भावना को भी मजबूत कर रहा है।
23 अगस्त को 630 स्थानों पर एक साथ होगा महाअभियान
संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा 23 अगस्त, रविवार को इस महाअभियान के छठे चरण का शुभारंभ किया जाएगा। देशभर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों सहित 630 स्थानों पर एक साथ पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा। मिशन के लाखों श्रद्धालु और स्वयंसेवक इसमें भाग लेते हुए करीब 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगे।
पौधारोपण के साथ संरक्षण का भी संकल्प
इस अभियान की खासियत यह है कि मिशन पौधे लगाने तक ही अपनी जिम्मेदारी सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षण देने का संकल्प भी निभाता है। प्रत्येक पौधे की तीन से पांच वर्षों तक नियमित देखभाल की जाएगी, ताकि वे विकसित होकर सघन लघु वनों का रूप ले सकें, जैव विविधता को बढ़ावा मिले और स्थानीय पर्यावरण तंत्र मजबूत हो।
बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच संत निरंकारी मिशन का यह अभियान प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देता है। मिशन का मानना है कि धरती केवल हमारी विरासत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी साझा जिम्मेदारी भी है।
