Connect with us

जौनपुर

छह माह की मेहनत से आकार ले रहीं मां दुर्गा की प्रतिमाएं

Published

on

Loading...
Loading...

खेतासराय में बंगाल के मूर्तिकार तैयार कर रहे 52 प्रतिमाएं, आठ फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा होगी खास आकर्षण

जौनपुर (जयदेश)। शारदीय नवरात्रि नजदीक आते ही जिले में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पूजा पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं, मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को तैयार करने में मूर्तिकार दिन-रात जुटे हैं। शाहगंज-जौनपुर मुख्य मार्ग पर बारां मोड़ के पास मिट्टी से देवी-देवताओं के स्वरूप गढ़े जा रहे हैं।

खेतासराय सराय में करीब तीन दशक से दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष भी कलकत्ता से आए मूर्तिकारों की टीम मार्च महीने से ही प्रतिमा निर्माण में जुटी है। मूर्तिकार उत्तम पाल के अनुसार, इस बार उन्हें कुल 52 प्रतिमाओं के निर्माण का ऑर्डर मिला है, जिनकी बुकिंग पूरी हो चुकी है।

ढांचे से रंग-रोगन तक बारीक मेहनत

प्रतिमा बनाने के लिए सबसे पहले उपयुक्त मिट्टी जुटाई जाती है। इसके बाद बांस और अन्य सामग्री से ढांचा तैयार कर उस पर मिट्टी की कई परतें चढ़ाई जाती हैं। प्रतिमा को आकार देने के बाद सुखाने, रंग-रोगन, वस्त्र, आभूषण और सजावट का काम किया जाता है। इस दौरान देवी-देवताओं के पारंपरिक स्वरूप और धार्मिक मान्यताओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।

Advertisement

आठ फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा होगी खास

इस बार आठ फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है। इसमें भगवान शिव को नीचे लेटे हुए और उनके ऊपर मां काली को खड़े स्वरूप में दर्शाया जा रहा है। कलाकार प्रतिमा के चेहरे के भाव, मुद्रा और अन्य बारीकियों को सावधानी से उकेर रहे हैं।

पांच सदस्यीय टीम पिछले करीब छह महीने से लगातार प्रतिमा निर्माण में लगी है। टीम में सुभोजित पाल, सुरजीत पाल, मोंगल बग्धी, मिलोन बग्धी समेत अन्य कलाकार शामिल हैं। मूर्तिकार सुबोध पाल बताते हैं कि प्रतिमा निर्माण में सही मिट्टी का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। कई आवश्यक सामग्री कलकत्ता से मंगानी पड़ती है। मौसम का असर भी काम पर पड़ता है, इसलिए विशेष सावधानी बरतनी होती है।

कलाकारों का कहना है कि कई महीनों की मेहनत के बाद जब प्रतिमाएं पूजा पंडालों में पहुंचती हैं और श्रद्धालु दर्शन कर भाव-विभोर होते हैं, तो उनकी मेहनत सफल महसूस होती है। उनके लिए यह काम केवल रोजगार नहीं, बल्कि कला, आस्था और साधना का संगम है।

Advertisement

Copyright © 2024 Jaidesh News. Created By Hoodaa

You cannot copy content of this page