देवरिया
30 साल बाद भी नहीं मिला मेहनत का पूरा पैसा, गौरीबाजार चीनी मिल के किसान-मजदूर परेशान
750 मजदूरों और 3,500 किसानों के बकाये का मामला फिर चर्चा में, भुगतान की मांग को लेकर वर्षों से जारी है संघर्ष
देवरिया। गौरीबाजार स्थित बंद चीनी मिल के मजदूरों और गन्ना किसानों को अब तक बकाया भुगतान का इंतजार है। वर्ष 1996 में मिल बंद होने के बाद से ही प्रभावित श्रमिक और किसान अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दशकों बीत जाने के बावजूद भुगतान का मामला पूरी तरह हल नहीं होने से प्रभावित परिवारों की मुश्किलें बनी हुई हैं।
करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, चीनी मिल के करीब 750 मजदूरों और 3,500 किसानों का भुगतान बकाया होने का मुद्दा उठता रहा है। मई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में मजदूरों के लगभग 14.73 करोड़ रुपये और किसानों के 1.62 करोड़ रुपये बकाया होने का उल्लेख किया गया था।
वर्षों से जारी है संघर्ष
बकाया भुगतान की मांग को लेकर मजदूर और किसान लंबे समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बावजूद उनका पूरा पैसा नहीं मिल सका है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए यह केवल बकाये की रकम का मामला नहीं, बल्कि उनके अधिकार और आजीविका से जुड़ा गंभीर सवाल है।
प्रशासन से भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग
प्रभावित मजदूरों और किसानों ने प्रशासन से बकाये के निस्तारण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित कराया जाए, ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे परिवारों को राहत मिल सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि गौरीबाजार चीनी मिल के मजदूरों और गन्ना किसानों को उनका बकाया भुगतान आखिर कब मिलेगा? दशकों से जारी संघर्ष के बीच प्रभावितों की निगाहें अब प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायपूर्ण समाधान पर टिकी हैं।
