बलिया
दूसरे डिपो की बसों को चित्तू पांडेय चौराहे पर रोकने का आरोप
यात्रियों को बीच रास्ते उतारने से सुविधा पर सवाल, सभी डिपो की बसों के लिए समान व्यवस्था की मांग
रसड़ा (बलिया)। बलिया बस स्टैंड पर दूसरे डिपो से आने वाली रोडवेज बसों के संचालन को लेकर यात्रियों की सुविधा पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि बलिया डिपो की बसों को छोड़कर अन्य डिपो की रोडवेज बसों को यातायात पुलिस कर्मियों द्वारा चित्तू पांडेय चौराहे से आगे बस स्टैंड की ओर जाने से रोक दिया जाता है। इसके बाद संबंधित बसों के परिचालक यात्रियों को चित्तू पांडेय चौराहे पर ही उतार देते हैं। इससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।
व्यापार कल्याण समिति, रसड़ा के संरक्षक सुरेश चंद ने बताया कि 1 सितंबर 2026 को अंबेडकर नगर डिपो की एक बस के परिचालक द्वारा यात्रियों को चित्तू पांडेय चौराहे पर उतारने की बात सामने आई। उनका कहना है कि इस तरह की स्थिति पहले भी कई बार देखी जा चुकी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यातायात व्यवस्था के कारण बसों को बलिया बस स्टैंड तक जाने की अनुमति नहीं है तो यह व्यवस्था सभी डिपो की बसों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। अन्य डिपो की बसें भी उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की हैं। ऐसे में उनके साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
लिखित आदेश सार्वजनिक करने की मांग
सुरेश चंद ने कहा कि यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के बजाय बीच चौराहे पर उतारने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया जा रहा है, इसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या इस संबंध में यातायात पुलिस या रोडवेज विभाग की ओर से कोई लिखित आदेश जारी किया गया है। यदि ऐसा कोई आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यात्रियों और बस परिचालकों में भ्रम की स्थिति न रहे।
उन्होंने यह भी मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि यात्रियों को चौराहे पर उतारने की व्यवस्था वास्तव में यातायात पुलिस के निर्देश पर है या बस परिचालक स्वयं ऐसा कर रहे हैं। यदि इस संबंध में कोई मौखिक निर्देश या व्यवस्था प्रचलित है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।
सुरेश चंद ने रोडवेज के उच्चाधिकारियों और यातायात विभाग से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यात्री किराया देकर अपने गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद करता है। ऐसे में बिना स्पष्ट कारण बीच रास्ते उतारना यात्री हित में उचित नहीं है।
उन्होंने मांग की कि सभी डिपो की बसों के साथ समान व्यवहार किया जाए और यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट एवं स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
