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राम के चरित्र को अपनाना ही राम होनाः औघड़ गुरुपद संभव राम

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वाराणसी। अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव वाराणसी में आयोजित सायंकालीन गोष्ठी में समूह के अध्यक्ष औघड़ गुरुपद संभव राम ने सोमवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जुटे शिष्यों जीवन का सार समझते हुए कहा कि,राम के चरित्र को अपनाना ही राम होना है लेकिन हम केवल बाह्य रूप में ही अपनी दृष्टि लगाए हुए हैं। आज राम को तो पूज रहे हैं लेकिन उनके चरित्र की अनदेखी कर रहे हैं। मानसिकता खराब और विकृत होगी, हमारी संगत अच्छी नहीं होगी तो हम उस चीज को समझ नहीं पाएंगे।

उन्होंने कहा कि गुरु हाड़-मांस का शरीर नहीं होता है, गुरुपीठ में जो विचार व्यक्त होते हैं, उन विचारों की परिपक्वता ही हमारी समझ को बढ़ाती है और हमें अज्ञानता से धीरे-धीरे मुक्त करती है। भक्ति अभ्यंतर की वस्तु होती है। इसलिए जरूरत है अभ्यंतर के दृष्टिकोण की। हम सब लोग उस ‘एकेश्वर’ की ही संतान हैं लेकिन उसके टुकड़े-टुकड़े करके अपनी-अपनी रुचि और अक्ल के हिसाब से उसको बना लेते हैं। जिसके चलते आपस में धर्म के नाम पर लड़ते-झगड़ते हैं। अपनी आंखें खोलकर इस संसार और समाज में देखना-समझना होगा और उसके बाद निर्णय लेने होंगे।

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गोष्ठी की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व अपर निदेशक डा. वीपी सिंह ने की। अवकाश प्राप्त आइएएस श्रीप्रकाश सिंह, मुम्बई से आयीं शिक्षाविद् गुणिता मल्होत्रा, बोकारो झारखंड की समाज सेविका श्वेता सिंह, रांची के सुमन कुमार चौबे, लखनऊ के भोलानाथ त्रिपाठी ने भी अपने विचार रखे। मंगलाचरण यशवंत नाथ शाहदेव, संचालन डा. वामदेव पांडेय ने व धन्यवाद् ज्ञापन संस्था के व्यवस्थापक हरिहर यादव ने किया।

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