वाराणसी
बनारस के वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर मंथन
भारत-ईयू एफटीए और एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के जरिए निर्यात बढ़ाने पर हुई चर्चा
वाराणसी। वस्त्र मंत्रालय की वस्त्र समिति के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (TEFC) की ओर से बुधवार को एक होटल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बनारस और पूर्वांचल के वस्त्र उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने, निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के अनुरूप उद्योग को तैयार करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने की अपील
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा मनोहर देसाई ने वस्त्र उद्योग से जुड़े उद्यमियों और निर्यातकों से वैश्विक बाजार की बदलती जरूरतों को समझकर अपने उत्पादों और कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उद्योग से जुड़े लोगों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
TEFC की भूमिका की दी जानकारी
वस्त्र समिति के सचिव कार्तिकेय ढांडा ने टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्र का उद्देश्य वस्त्र उद्योग से जुड़े उद्यमियों और निर्यातकों को निर्यात प्रक्रिया तथा विभिन्न जरूरी पहलुओं को लेकर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
भारत-ईयू एफटीए की बारीकियां समझाईं
सहायक निदेशक अम्बरीश सिंह ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने टैरिफ रियायत, रूल्स ऑफ ओरिजिन और आवश्यक दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया के बारे में प्रतिभागियों को बताया। इससे निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में कारोबार की संभावनाओं और संबंधित प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिली।
वित्तीय सहायता की भी दी जानकारी
एक्जिम बैंक के क्षेत्रीय प्रमुख आशीष सोनी ने निर्यातकों और एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने निर्यात कारोबार को बढ़ाने के लिए वित्तीय संसाधनों की भूमिका और बैंक की ओर से उपलब्ध सहयोग के बारे में बताया।
सवालों के दिए जवाब
कार्यक्रम में डीजीएफटी के अधिकारियों के अलावा वस्त्र उद्योग से जुड़े उद्यमी और निर्यातक मौजूद रहे। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने निर्यात बढ़ाने, भारत-ईयू एफटीए तथा नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सवालों के जवाब देकर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
