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गाजीपुर

जखनिया सहकारी समिति में यूरिया के लिए लगी किसानों की लंबी कतारें, व्यवस्था पर उठे सवाल

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खाद उपलब्ध होने के बावजूद घंटों इंतजार से किसान परेशान, लिक्विड उर्वरकों के प्रचार-प्रसार की कमी पर जताई नाराजगी

किसानों ने कहा—सिर्फ योजनाएं नहीं, गांव-गांव जागरूकता और बेहतर वितरण व्यवस्था की भी है जरूरत

जखनिया (गाजीपुर)। खरीफ सीजन के बीच सोमवार को जखनिया स्थित जयदेश सहकारी समिति पर यूरिया खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। किसान सुबह से लाइन में लगकर निर्धारित मूल्य पर यूरिया प्राप्त करते नजर आए। किसानों का कहना था कि समिति पर फिलहाल यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है और खाद मिलने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वितरण व्यवस्था के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

खाद है, लेकिन व्यवस्था से किसान असंतुष्ट

समिति पर मौजूद कई किसानों ने बताया कि खाद उपलब्ध होने के बावजूद लंबी लाइन में खड़े रहना उनकी मजबूरी बन गई है। उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल, रेलवे टिकट काउंटर, तहसील और सहकारी समितियों में लंबी कतारें अब आम बात हो गई हैं, जिससे समय और श्रम दोनों की हानि होती है।

लिक्विड उर्वरकों पर जागरूकता बढ़ाने की मांग

कुछ किसानों ने कहा कि सरकार तरल (लिक्विड) उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन अधिकांश किसानों का भरोसा अभी भी पारंपरिक डीएपी और यूरिया पर ही बना हुआ है। किसानों का आरोप था कि कृषि विभाग की ओर से गांव-गांव चौपाल, प्रशिक्षण शिविर और जागरूकता अभियान प्रभावी ढंग से नहीं चलाए जा रहे हैं। उनका मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से लिक्विड उर्वरकों के लाभ और उपयोग की जानकारी दी जाए तो रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो सकती है।

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जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की जरूरत

किसानों ने सुझाव दिया कि कृषि विभाग के अधिकारी नियमित रूप से गांवों में पहुंचकर किसानों से संवाद करें और वैकल्पिक उर्वरकों के बारे में जानकारी दें। उनका कहना था कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता अभियान से ही किसानों को वास्तविक लाभ मिल सकेगा।

स्थायी समाधान की उठी मांग

खाद वितरण के दौरान किसानों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर अन्नदाता कब तक यूरिया के लिए लंबी लाइनों में खड़ा रहेगा। किसानों का मानना है कि वितरण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाकर ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

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