वाराणसी
राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन को मिलेगी नई रफ्तार, केंद्रीय संस्कृति मंत्री से मिले कुलपति
एमओयू की तकनीकी बाधाएं 10 दिन में दूर करने का आश्वासन, सरस्वती भवन की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण को मिलेगा बल
प्रो. बिहारी लाल शर्मा बोले- भारतीय ज्ञान-संपदा को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से शिष्टाचार भेंट कर राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन (ज्ञान-भारतम्) के तहत विश्वविद्यालय में संचालित दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण और संवर्धन कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने संस्कृति मंत्रालय और विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू से जुड़ी तकनीकी बाधाओं के शीघ्र समाधान का आग्रह किया।
बैठक में केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पांडुलिपि-संपदा के संरक्षण के प्रयासों की सराहना करते हुए आश्वासन दिया कि एमओयू से संबंधित तकनीकी समस्याओं का समाधान अगले 10 दिनों के भीतर सुनिश्चित कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन के अंतर्गत संचालित परियोजना को निर्बाध रूप से आगे बढ़ाने में संस्कृति मंत्रालय पूरा सहयोग देगा।
चार माह से लंबित था परियोजना कर्मियों का मानदेय
एमओयू से जुड़ी तकनीकी बाधाओं के कारण पिछले लगभग चार माह से परियोजना से जुड़े कर्मियों का मानदेय लंबित था। केंद्रीय मंत्री के आश्वासन के बाद इस समस्या के शीघ्र समाधान और परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि मिशन (ज्ञान-भारतम्) के साथ हुए तीन वर्षीय एमओयू के तहत विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्तकालय में सुरक्षित सवा लाख से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण, सूचीकरण, डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।
दुर्लभ धरोहरों के संरक्षण पर जोर
सरस्वती भवन पुस्तकालय में संवत् 1181 की कागज पर लिखित श्रीमद्भागवत, स्वर्णाक्षरों में लिखी भगवद्गीता, वस्त्र पर अंकित दुर्गासप्तशती, चित्रांकित रासपंचाध्यायी, भोजपत्र, ताम्रपत्र तथा लाख, काष्ठ और वस्त्र पर लिखित अनेक दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं। ये पांडुलिपियां देवनागरी, शारदा, खरोष्ठी, मैथिली, उड़िया, गुरुमुखी, तेलुगु, कन्नड़ सहित कई भारतीय लिपियों में उपलब्ध हैं।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि सरस्वती भवन की पांडुलिपियां केवल विश्वविद्यालय या उत्तर प्रदेश की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका संरक्षण, डिजिटलीकरण और वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से भारतीय ज्ञान-संपदा के संरक्षण और संवर्धन के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी।
