गाजीपुर
बंदरों का बढ़ता आतंक, लोगों का जीना हुआ मुश्किल
दुकानदारों को आर्थिक नुकसान, महिलाओं-बच्चों में दहशत; रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों से सामान छीन रहे बंदर
नंदगंज (गाजीपुर)। नंदगंज बाजार में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बाजार के विभिन्न मोहल्लों, रेलवे स्टेशन तथा आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों की संख्या में बंदरों के झुंड घूम रहे हैं। इनके उत्पात से दुकानदार, राहगीर, महिलाएं, बच्चे और यात्री सभी परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की उदासीनता के कारण समस्या दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।

दुकानदारों और ठेला व्यवसायियों का कहना है कि बंदर आए दिन फलों, खाद्य सामग्री और अन्य सामान उठाकर भाग जाते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं राह चलते लोगों के हाथों से भी खाने-पीने का सामान छीन लेने की घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय महिलाओं ने बताया कि बंदरों के डर से उन्होंने घरों की छतों और बालकनियों पर जाना लगभग बंद कर दिया है। आवश्यक कार्य होने पर भी उन्हें हाथ में डंडा लेकर जाना पड़ता है। बंदर छतों पर सूख रहे कपड़ों को फाड़ देते हैं, पानी की टंकियों के ढक्कन खोल देते हैं तथा घरों में घुसकर रसोई और फ्रिज में रखा खाद्य सामान उठा ले जाते हैं। कई बार पानी की टोंटी खोल देने से पूरी टंकी खाली हो जाती है।
लोगों का कहना है कि छोटे बंदर अधिक शरारती और आक्रामक हो गए हैं। उनके शोर मचाते ही बड़े बंदरों का झुंड लोगों की ओर दौड़ पड़ता है। बंदरों के आपसी झगड़ों के दौरान बीच में आने वाले लोगों के घायल होने का भी खतरा बना रहता है। अब तक कई लोग बंदरों के हमले और काटने से घायल हो चुके हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों में विशेष रूप से भय का माहौल है।

नंदगंज रेलवे स्टेशन पर भी बंदरों का आतंक यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों के हाथों से बंदर सामान छीन लेते हैं और कई बार उन्हें दौड़ा भी देते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन जाती है। अभिभावकों का कहना है कि बंदरों के डर से अब वे अपने बच्चों को अकेले ट्यूशन भेजने से भी हिचक रहे हैं।
वन विभाग से मानवीय कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को मानवीय तरीके से पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए, ताकि बाजारवासियों को इस समस्या से राहत मिल सके और बंदरों को भी किसी प्रकार की हानि न पहुंचे।
