गाजीपुर
सद्गुरु सदाफल देव महाराज की 139वीं जयंती पर गूंजा ब्रह्मज्ञान
सादात में वैदिक यज्ञ, भजन और आध्यात्मिक प्रवचन से भक्तिमय हुआ माहौल
सादात। अनंत श्री सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 139वीं जयंती मंगलवार को सादात में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत उमरहा आश्रम, वाराणसी से आए विद्वान साधक पुरोहित मनोज यादव ने वैदिक ऋचाओं के साथ एक कुंडीय यज्ञ संपन्न कराई।
मुख्य अतिथि फनिंन्द्र राय ने सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज के जीवन और आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सद्गुरु देव का जन्म भाद्र कृष्ण चतुर्थी, संवत 1945 के अनुसार 25 अगस्त 1888 को बलिया जिले के पकड़ी गांव में हुआ था।
विशिष्ट अतिथि चंद्रदेव यादव ने कहा कि सद्गुरु ही विरही आत्माओं को भवसागर से पार कराने का मार्ग दिखाते हैं। अनिल सिंह ने कहा कि मानव जीवन परमात्मा के भजन के लिए मिला है, जो सद्गुरु के ब्रह्मज्ञान से संभव है। पलटू प्रजापति ने कहा कि मानव तन प्रभु की कृपा से मिलता है, जबकि सद्गुरु की कृपा से आवागमन के चक्र से मुक्ति मिलती है।
डॉ. अनिल शर्मा ने सद्गुरु को सभी गुरुओं का परम गुरु बताया। ध्रुव वर्मा ने कहा कि सद्गुरु सदाफल देव महाराज ने 17 वर्ष की कठोर साधना के बाद पूरे विश्व में ब्रह्मविद्या के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया था।
कार्यक्रम में संत लल्लन और कपिल देव शर्मा ने भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस दौरान श्याम ला ने यशवंत वर्मा को सद्गुरु सदाफल देव द्वारा रचित महासद्ग्रंथ सप्रेम भेंट किया।
कार्यक्रम का संचालन जिला उपदेश्टा केशव सिंह यादव ने किया। इकाई संत समाज सादात की ओर से पूर्व जिला संयोजक ओम प्रकाश राम ने सभी संतों और अतिथियों के प्रति आभार जताया।
