वाराणसी
जश्ने ईद-ए-गदीर: अर्दली बाजार शिया जामा मस्जिद में होंगे विशेष आयोजन
18 जिलहिज्जा को मनाया जाएगा पर्व
शिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक पर्व जश्ने ईद-ए-गदीर इस वर्ष 18 जिलहिज्जा को उल्लासपूर्वक मनाया जाएगा। इस अवसर पर वाराणसी के अर्दली बाजार स्थित शिया जामा मस्जिद मीर गुलाम अब्बास में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
तीन दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा
धार्मिक महफिल और आमाल
त्योहार के उपलक्ष्य में 4 जून (गुरुवार) और 7 जून (रविवार) को रात 8 बजे से धार्मिक महफिल का आयोजन किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त 5 जून (शुक्रवार) को सुबह 8 बजे ईद-ए-गदीर के विशेष आमाल संपन्न होंगे।
आमाल का संचालन
आमाल का संचालन इमामे जुमा व जमात मौलाना तौसीफ अली साहब द्वारा कराया जाएगा।
धार्मिक विद्वानों की भागीदारी
कार्यक्रम में कई धर्मगुरु एवं शायर शामिल होंगे, जिनमें प्रमुख रूप से—
- मौलाना तौसीफ अली
- मौलाना हसन रज़ा
- मौलाना इकबाल हैदर ईमानी
- हसन वास्ती
- सैयद नबील हैदर
- जैन बनारसी
- जीशान बनारसी
- ज़ैद आजमी
- शाहिद बनारसी
- एरम बनारसी
ये सभी ईद-ए-गदीर के महत्व पर तकरीर और अपने कलाम पेश करेंगे।
ईद-ए-गदीर का महत्व
ईद-ए-गदीर शिया मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख धार्मिक पर्व है, जिसे इस्लामिक कैलेंडर के अंतिम महीने जिलहिज्जा की 18 तारीख को मनाया जाता है।
यह दिन उस ऐतिहासिक घटना की याद में मनाया जाता है जब पैगंबर मुहम्मद साहब ने गदीर-ए-खुम के स्थान पर हजरत अली (रजि.) को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।
ऐतिहासिक घोषणा
मान्यता के अनुसार पैगंबर ने कहा था—
“जिस-जिस का मैं मौला हूं, उस-उस के अली मौला हैं।”
पर्व की परंपराएं
इस दिन शिया समुदाय के लोग—
- नए कपड़े पहनते हैं
- मस्जिदों और घरों को सजाते हैं
- एक-दूसरे को बधाई देते हैं
- दावतों का आयोजन करते हैं
- कई लोग रोजा भी रखते हैं
