वाराणसी
गंगा की धारा पर संकट: अदलपुरा में पैदल पार हो रही सदानीरा, सिंचाई पर भी मंडराया खतरा
शीतला धाम के पास गंगा सिमटी, रेत के बीच नाले जैसी बह रही धारा
वाराणसी। गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए वर्षों से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अदलपुरा स्थित शीतला धाम के पास गंगा की वर्तमान स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। वाराणसी और चुनार के बीच गंगा की मुख्य धारा इतनी सिमट गई है कि लोग कुछ ही सेकंड में पैदल नदी पार कर रहे हैं। दूर-दूर तक फैली रेत के बीच बहती पतली जलधारा देखकर लोगों को विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि यह वही गंगा है, जिसे देश की जीवनदायिनी नदी माना जाता है।
नौकायन तो दूर, नाव चलाने लायक भी नहीं बचा पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले एक माह से यहां नौका संचालन तक प्रभावित है। एक ओर गंगा जलमार्ग पर मालवाहक जहाज और क्रूज संचालन की योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर अदलपुरा क्षेत्र में नाव चलाने लायक भी पर्याप्त जल नहीं बचा है। गंगा की मुख्य धारा रेत में सिमटकर रह गई है और जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है।
सिंचाई संकट से जूझ रहे किसान
गंगा का जलस्तर घटने का सबसे बड़ा असर सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा है। अदलपुरा स्थित लिफ्ट कैनाल के पंप तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे किसानों के सामने धान की नर्सरी और आगामी फसल की सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। सिंचाई विभाग ने गंगा की धारा से पंप तक पानी पहुंचाने के लिए जेसीबी मशीनों से कृत्रिम नहर बनाने का कार्य शुरू किया है।
जेसीबी से बनाई जा रही कृत्रिम जलधारा
शीतला धाम के निकट गंगा की सूखी धारा में तीन से चार किलोमीटर तक रेत की खुदाई कर कृत्रिम चैनल तैयार किया जा रहा है, ताकि गंगा का पानी लिफ्ट कैनाल के पंप तक पहुंच सके। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लगभग 500 मीटर लंबा ऊंचा रेतीला टीला सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है, जिसे हटाने का प्रयास जारी है।
किसानों की चिंता बढ़ी
धान की अगेती नर्सरी का समय लगभग समाप्त हो चुका है और पछेती फसल की तैयारी का समय भी नजदीक है। यदि जल्द ही कैनाल पंपों तक पानी नहीं पहुंचा, तो क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई के लिए पानी का संकट गहराया तो खरीफ सीजन की खेती प्रभावित हो जाएगी।
विभाग ने बताया चुनौतीपूर्ण स्थिति
सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगा की मुख्य धारा पंप स्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर खिसक गई है। वर्तमान प्रयासों का उद्देश्य किसी भी तरह पानी को लिफ्ट कैनाल तक पहुंचाना है, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराया जा सके।
गंगा की स्थिति बनी चिंता का विषय
गंगा की यह स्थिति केवल पर्यावरणीय चिंता का विषय नहीं है, बल्कि इससे कृषि, नौवहन और स्थानीय आजीविका भी प्रभावित हो रही है। अदलपुरा में गंगा का सिकुड़ता स्वरूप नदी संरक्षण और जल प्रबंधन से जुड़े सवालों को फिर से केंद्र में ला रहा है।
