मिर्ज़ापुर
मानव प्रकृति और प्राकृतिक जगत का अभिन्न हिस्सा है मनुष्य : प्रो. अवधेश चौबे
केबीपीजी कॉलेज में ‘बोधि पथ’ कार्यशाला के छठे दिन बौद्ध दर्शन पर विशेष व्याख्यान, करुणा और अहिंसा के सिद्धांतों पर हुई चर्चा
बौद्ध दर्शन में प्रकृति और मानव के गहरे संबंध को बताया गया, सामाजिक समानता और मानवीय गरिमा पर दिया जोर
मिर्जापुर। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ एवं केबीपीजी कॉलेज, मिर्जापुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय ‘बोधि पथ’ कार्यशाला के छठे दिन सोमवार को बीएड विभाग में बौद्ध दर्शन पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।
व्याख्यान के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (अगरतला विश्वविद्यालय, त्रिपुरा) के बौद्ध दर्शन विभाग के प्रो. अवधेश कुमार चौबे ने बौद्ध दर्शन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव प्रकृति और प्राकृतिक जगत से अलग कोई स्वतंत्र इकाई नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांड के निरंतर परिवर्तनशील प्रवाह का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि बौद्ध दर्शन में मानव और प्रकृति के बीच गहरा एवं अविभाज्य संबंध बताया गया है। यह दर्शन मनुष्य को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है और सभी जीवों के प्रति संवेदना एवं करुणा का भाव विकसित करता है।
कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के वयोवृद्ध सदस्य पंडित युवानेश मिश्र ने कहा कि बौद्ध दर्शन ने करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग जैसे व्यावहारिक सिद्धांतों के माध्यम से मानव सभ्यता को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि इस दर्शन ने प्राचीन काल से ही सामाजिक भेदभाव और जातिगत असमानताओं का विरोध करते हुए समानता एवं मानवीय गरिमा को बढ़ावा दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा संकाय के अध्यक्ष प्रो. भवभूति मिश्र ने की। कार्यशाला का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. कुलदीप पांडे ने किया।
इस अवसर पर प्रो. नम्रता मिश्रा, प्रो. भानु प्रताप सिंह, भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीतम सिंह, डॉ. करनैल सिंह, डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
