वाराणसी
बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के बीच एयरटेल ने 98.4 बिलियन स्पैम कॉल्स को किया ब्लॉक
डिजिटल ठगी का बढ़ता खतरा
वाराणसी। भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर धोखाधड़ी का दायरा भी बढ़ रहा है। स्पैम कॉल और फिशिंग संदेशों से आगे बढ़कर अब पहचान की चोरी, फर्जी बैंकिंग अनुरोध, दुर्भावनापूर्ण लिंक, निवेश संबंधी ठगी और ओटीपी के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामले सामने आ रहे हैं।
छह वर्षों में 52,976 करोड़ से अधिक का नुकसान
प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के मुताबिक पिछले छह वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के कारण भारतीयों को 52,976 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों में भी साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है।
सितंबर 2024 में शुरू किया एआई आधारित सुरक्षा तंत्र
एयरटेल ने सितंबर 2024 में नेटवर्क आधारित एआई-संचालित स्पैम डिटेक्शन समाधान शुरू किया था। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य नेटवर्क स्तर पर स्पैम कॉल और संदेशों की पहचान कर ग्राहकों को अतिरिक्त ऐप या मैनुअल रिपोर्टिंग की जरूरत के बिना सुरक्षा प्रदान करना है।
98.4 बिलियन स्पैम कॉल और 4.4 बिलियन संदेश की पहचान
कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके एआई आधारित सुरक्षित नेटवर्क पहल ने 98.4 बिलियन से अधिक स्पैम कॉल और 4.4 बिलियन स्पैम संदेशों की पहचान की है। एयरटेल का कहना है कि यह पहल नेटवर्क स्तर पर डिजिटल धोखाधड़ी की रोकथाम के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
1.62 मिलियन से अधिक हानिकारक लिंक ब्लॉक
एयरटेल के अनुसार, उसकी प्रणाली ने एसएमएस, मैसेजिंग ऐप, ईमेल और ब्राउजर रीडायरेक्ट के जरिए साझा किए गए 1.62 मिलियन से अधिक दुर्भावनापूर्ण लिंक को भी ब्लॉक किया है। यह सुविधा मोबाइल और वाई-फाई ब्रॉडबैंड ग्राहकों के लिए लागू होने की बात कंपनी ने कही है।
ओटीपी धोखाधड़ी की पहचान और बिजनेस नेम डिस्प्ले
कंपनी ने ओटीपी से जुड़ी धोखाधड़ी की पहचान के लिए एआई आधारित सुरक्षा व्यवस्था भी शुरू की है। इसके अलावा बिजनेस नेम डिस्प्ले सुविधा के जरिए सत्यापित कंपनियों की कॉल और संभावित फर्जी नंबरों के बीच अंतर करने में मदद की जाती है। कंपनी के अनुसार, इससे फर्जी बैंकिंग और ग्राहक सेवा प्रतिनिधियों के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है।
