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शिक्षा

BHU : 75 से ज्यादा रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल से हटाए गए

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एआई जनरेटेड कंटेंट पर बढ़ी सख्ती, कई रिसर्च पेपर जांच के दायरे में

वाराणसी। पिछले पांच वर्षों में बीएचयू के प्रोफेसरों से जुड़े 75 से अधिक रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नलों से हटाए जा चुके हैं। संयुक्त रूप से किए गए शोध कार्यों से जुड़े विद्वानों पर आरोप है कि कई शोध पत्र एआई टूल की मदद से तैयार किए गए थे। साथ ही माइक्रोस्कोप से ली गई तस्वीरों में भी हेरफेर किए जाने की बात सामने आई है।

प्लेगरिज्म (कॉपी-पेस्ट), डुप्लीकेट डेटा और अधिकारों से जुड़े विवादों जैसी अनियमितताओं के बीच ये रिसर्च पेपर प्रकाशित किए गए थे। वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 के दौरान सबसे अधिक 63 मामलों में गड़बड़ियां पाई गईं। वर्ष 2026 का डेटा अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन अनुमान है कि एआई के बढ़ते उपयोग के बाद कई जर्नलों द्वारा रिसर्च पेपरों की जांच में और अधिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं।

ये सभी रिसर्च पेपर रिट्रैक्शन वाच, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के सेंटर ऑफ बायो टेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन समेत कई जर्नलों में सार्वजनिक किए गए हैं। इनकी वेबसाइटों पर भी संबंधित रिसर्च पेपर उपलब्ध हैं। इनमें बीएचयू के शोध पत्रों के साथ वे शोध भी शामिल हैं, जिनमें बीएचयू के वैज्ञानिकों या सदस्यों को शोधकर्ता के रूप में शामिल किया गया था।

साल-दर-साल सामने आई गड़बड़ियों का विवरण

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2020 – करीब छह रिसर्च पेपरों में डुप्लीकेट डेटा और तस्वीरों की सत्यता से जुड़ी गड़बड़ियां पाई गईं।

2021 – रिसर्च में शामिल 12 तस्वीरों में हेरफेर (मैनीपुलेशन) किया गया। यह मामले खास तौर पर मैटेरियल साइंस और लाइफ साइंस के रिसर्च पेपरों में सामने आए।

2022 – करीब 22 रिसर्च पेपरों में गलत पियर रिव्यू के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

2023 – लगभग 16 रिसर्च पेपरों में प्लेगरिज्म और अधिकारों से जुड़े विवाद सामने आए।

2024 – 12 बड़े प्रकाशकों ने प्रक्रिया संबंधी खामियों के आधार पर बड़ी संख्या में रिसर्च पेपर हटा दिए।

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2025 – करीब 13 रिसर्च पेपर एआई की मदद से तैयार किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि कंटेंट और डेटा एआई से निकाला गया था।

2026 – कई जर्नलों में अभी जांच जारी है।

अब ऐसे रिसर्च पेपरों पर फंड हासिल करना होगा मुश्किल

रिसर्च फंड उपलब्ध कराने वाली देश की प्रमुख संस्थाओं में शामिल अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने शोध कार्यों में अनियमितताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बीते 4 मई को एडवांस्ड रिसर्च ग्रांट प्रोग्राम के तहत आवेदन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए नए नियम लागू करते हुए एएनआरएफ ने कहा कि वैज्ञानिकों को पिछले पांच वर्षों में वापस लिए गए शोध और उसके कारणों का पूरा विवरण देना होगा।

प्लेगरिज्म रोकने के लिए शोध प्रस्तावों का मौलिक होना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही एआई की मदद से तैयार सामग्री का खुलासा करना भी जरूरी होगा। शोधकर्ताओं को यह घोषणापत्र भी जमा करना होगा कि उनका प्रपोजल पूरी तरह एआई-जनरेटेड नहीं है।

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