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वाराणसी

प्रयागराज से काशी पहुंच रही श्रद्धालुओं की भीड़, रेलवे स्टेशनों पर भारी दबाव

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वाराणसी में महाकुंभ 2025 के चलते श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है। संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के बाद काशी आने वाले यात्रियों की संख्या बुधवार को अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। शाम होते ही वाराणसी कैंट, बनारस और वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन के साथ-साथ रोडवेज बस अड्डों पर भी भक्तों का दबाव काफी बढ़ गया।

पूर्वोत्तर भारत से आने वाली ट्रेनों में सीटें भर चुकी थीं, जिससे यात्रियों को बर्थ तक मिल पाना मुश्किल हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यात्री समरेश सिंह ने रेलवे प्रशासन से शिकायत करते हुए बताया कि बनारस-रांची एक्सप्रेस में उनके 12 टिकट कन्फर्म हैं, लेकिन हालात बेहद कठिन हैं।

दूसरी ओर, प्रयागराज के रामबाग, झूंसी, प्रयाग जंक्शन और फाफामऊ जाने वाली स्पेशल ट्रेनों में अपेक्षाकृत भीड़ कम देखने को मिली। वहीं वाराणसी कैंट स्टेशन पर टिकट चेकिंग स्टाफ को यात्रियों से उनके गंतव्य की जानकारी लेने की जिम्मेदारी दी गई ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

रेलवे प्रशासन ने प्रयागराज जंक्शन के लिए दो, अयोध्या धाम जंक्शन के लिए एक, पटना के लिए एक और औड़िहार समेत अन्य रूटों पर आधा दर्जन से अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। वहीं, रेलवे सुरक्षा विशेष बल के जवान लगातार प्लेटफार्मों पर लाउडहेलर से यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी देते रहे। ट्रेनों के सुचारु संचालन के लिए ऑपरेटिंग स्टाफ की संख्या भी बढ़ा दी गई। स्टेशन अधीक्षक, उप स्टेशन अधीक्षक और स्टेशन मास्टर पावर केबिन से लेकर डिप्टी एसएस ऑफिस तक ट्रेनों की आवाजाही पर कड़ी नजर बनाए रहे।

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बनारस स्टेशन से पांच कुंभ स्पेशल ट्रेनों का संचालन

महाकुंभ के श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूर्वोत्तर रेलवे ने गुरुवार को पांच कुंभ स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया। बनारस से दोपहर 12:30 बजे और रात 8:30 बजे प्रयागराज रामबाग के लिए ट्रेनें रवाना हुईं। इसके अलावा, गोरखपुर से झूंसी के लिए रात 9:30 बजे और झूंसी से गोरखपुर के लिए सुबह 7:45 बजे ट्रेन चलाई गई। एक अन्य ट्रेन बनारस से सुबह 8 बजे झूंसी के लिए रवाना हुई।

विदेशी सैलानियों ने लिया महाकुंभ का अनोखा अनुभव

महाकुंभ 2025 में इस बार विदेशी पर्यटकों की दिलचस्पी में बड़ा बदलाव देखा गया है। पहले जहां वे केवल नागा साधुओं और उनके रहस्यमय जीवन को देखने आते थे, वहीं इस बार वे मेले की स्वच्छता, यातायात व्यवस्था और आयोजन प्रबंधन का अध्ययन करने भी पहुंचे हैं।

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इस साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक प्रयागराज आए और भारतीय संस्कृति को नजदीक से देखा। अग्नि अखाड़े के सचिव महामंडलेश्वर संपूर्णानंद ने बताया कि विदेशी सैलानियों ने यहां ब्रह्मचारी और गृहस्थ जीवन के बीच के अंतर को समझने में गहरी रुचि दिखाई। महाकुंभ 2025 का यह भव्य आयोजन विश्वभर के पर्यटकों के लिए एक अनोखा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव बन रहा है।

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