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वाराणसी

दो दिन में 500 क्विंटल बिक्री से 1.25 करोड़ का कारोबार

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रथयात्रा मेले में नानखटाई की मिठास

भगवान जगन्नाथ के प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनी नानखटाई, अंतिम दिन रिकॉर्ड कारोबार की उम्मीद

वाराणसी। काशी के प्रसिद्ध लक्खा मेलों में शामिल तीन दिवसीय रथयात्रा मेले में इस बार भी भगवान जगन्नाथ के प्रिय प्रसाद नानखटाई की जमकर धूम है। मेले के शुरुआती दो दिनों में ही करीब 500 क्विंटल नानखटाई की बिक्री हो चुकी है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रसाद के रूप में नानखटाई खरीदकर भगवान जगन्नाथ को अर्पित कर रही है। कारोबारियों के अनुसार दो दिनों में ही करीब 1.25 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया है।

रथयात्रा मेले में सुबह से देर रात तक नानखटाई की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही। वाराणसी के अलावा आसपास के जिलों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी पारंपरिक नानखटाई खरीदने पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था के कारण नानखटाई मेले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गई है।

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व्यापारी आकाश गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष मेले के पहले दो दिनों में लगभग 500 क्विंटल नानखटाई बिक चुकी है और करीब 1.25 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। उन्होंने बताया कि कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण नानखटाई के दाम पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत बढ़े हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और खरीदारी पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा है।

200 से 2000 रुपये किलो तक बिक रही नानखटाई

मेले में शैलपुत्री, पहड़िया, सलारपुर सहित कई क्षेत्रों से आए कारोबारियों ने अस्थायी दुकानें लगाई हैं। दुकानों पर देसी घी से तैयार पारंपरिक नानखटाई के साथ-साथ कई प्रीमियम वैरायटी भी उपलब्ध हैं। बाजार में नानखटाई की कीमत 200 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलोग्राम तक है

नानखटाई व्यवसायी बनारसी गुप्ता ने बताया कि इस बार पारंपरिक स्वाद के साथ चॉकलेट और नारियल मिक्स नानखटाई की मांग सबसे ज्यादा है। खास रेसिपी और बेहतर स्वाद के कारण प्रीमियम वैरायटी को लोग काफी पसंद कर रहे हैं।

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अंतिम दिन बढ़ सकती है बिक्री

व्यापारियों को उम्मीद है कि रथयात्रा मेले के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के साथ नानखटाई की बिक्री में और तेजी आएगी। कारोबारियों का कहना है कि इस बार बिक्री पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ को नानखटाई अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। यही कारण है कि रथयात्रा मेले में आने वाला लगभग हर श्रद्धालु प्रसाद के रूप में नानखटाई जरूर खरीदता है। यह परंपरा जहां धार्मिक आस्था को मजबूत कर रही है, वहीं स्थानीय कारोबारियों के लिए रोजगार और व्यापार का बड़ा अवसर भी साबित हो रही है।

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