बलिया
रसड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर अतिक्रमण का मामला गरमाया, निरीक्षण के बाद फिर सज गईं दुकानें
डीआरएम के दौरे से पहले हटाया गया कथित अतिक्रमण, बाद में दोबारा संचालन पर उठे सवाल
रेलवे भूमि पर अवैध दुकानों के आरोप, आरपीएफ की भूमिका पर सवाल; निष्पक्ष जांच की मांग
रसड़ा (बलिया)। रसड़ा रेलवे स्टेशन के बाहर कथित रूप से संचालित मांस-मुर्गे एवं अन्य दुकानों को लेकर रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) आशीष जैन के निरीक्षण से पहले स्टेशन परिसर के बाहर स्थित कथित अतिक्रमण को हटा दिया गया, लेकिन निरीक्षण समाप्त होने के बाद वही दुकानें फिर से संचालित होने लगीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीआरएम के आगमन से पहले स्टेशन परिसर के बाहर का पूरा दृश्य बदला हुआ नजर आया। जिन स्थानों पर कथित रूप से दुकानें लगती थीं, वहां सफाई और खाली स्थान दिखाई देने लगे। लेकिन अधिकारियों के लौटने के बाद उन्हीं स्थानों पर फिर से दुकानें सज गईं। मौके पर रखे पिंजरे, दुकान का सामान और अन्य सामग्री को लेकर लोगों ने रेलवे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
लोगों का कहना है कि यदि ये दुकानें रेलवे भूमि पर बिना अनुमति संचालित हो रही हैं तो इन्हें केवल निरीक्षण के समय हटाने के बजाय स्थायी रूप से क्यों नहीं हटाया जाता। निरीक्षण के बाद दोबारा दुकानें लग जाने से कार्रवाई की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
व्यापार कल्याण समिति के संरक्षक सुरेशचंद्र जायसवाल और भाजपा नेता प्रवीण सिंह ने रेलवे प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्टेशन परिसर या रेलवे भूमि पर अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो उसके खिलाफ स्थायी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुरेशचंद्र जायसवाल ने आरोप लगाया कि बार-बार दुकानें लगने के पीछे आरपीएफ की मिलीभगत हो सकती है। हालांकि, किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने स्टेशन के बाहर स्थित प्राचीन भगवान शिव मंदिर के आसपास मांस-मुर्गे की दुकानों के संचालन पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मंदिर के आसपास इस तरह की दुकानें संचालित होने से धार्मिक भावनाएं प्रभावित होती हैं।
लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि स्टेशन परिसर और आसपास की रेलवे भूमि का सर्वे कराकर कथित अतिक्रमण की जांच कराई जाए। यदि दुकानें बिना अनुमति संचालित पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ प्रभावी और स्थायी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सवाल यह है कि यदि रेलवे प्रशासन को इन दुकानों के संचालन की जानकारी है तो अब तक स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि जानकारी नहीं थी तो निरीक्षण के दौरान इन्हें हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। इन सवालों का जवाब रेलवे प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई से ही स्पष्ट हो सकेगा।
