वाराणसी
12 सितंबर को काशी में गूंजेगा श्रीकृष्ण नाम, जन्मभूमि मुक्ति की मांग को लेकर निकलेगी शोभायात्रा
विश्व हिंदू महासंघ ने शिवपुर में बैठक कर तैयारियों को दिया अंतिम रूप, कार्यकर्ताओं को सौंपी जिम्मेदारियां
वाराणसी। मथुरा स्थित भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की मांग को लेकर विश्व हिंदू महासंघ की ओर से 12 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में शोभायात्रा निकाली जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष भिखारी प्रजापति के आह्वान पर प्रस्तावित शोभायात्रा दोपहर 12 बजे निकाली जाएगी। इसे लेकर संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

शिवपुर में हुई बैठक, कार्यकर्ताओं को मिली जिम्मेदारी
वाराणसी में शोभायात्रा को सफल बनाने के लिए बुधवार को शिवपुर में विश्व हिंदू महासंघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। जिला अध्यक्ष चंदन तिवारी के नेतृत्व में आयोजित बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपने के साथ ही अधिक से अधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई।
मथुरा में जन्मभूमि को लेकर लंबे समय से विवाद
मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर विवाद का इतिहास कई शताब्दियों पुराना बताया जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार वर्तमान विवादित स्थल को कटरा केशवदेव क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1618 में ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला द्वारा यहां मंदिर निर्माण कराए जाने का उल्लेख मिलता है। इसके बाद मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल में वर्ष 1670 में केशवदेव मंदिर को ध्वस्त किए जाने और उसी परिसर में शाही ईदगाह के निर्माण का उल्लेख विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।

मथुरा जिला प्रशासन की वेबसाइट भी शाही ईदगाह को औरंगजेब के शासनकाल से जोड़ती है और इसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के समीप स्थित बताती है। विवादित परिसर को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह का निर्माण श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर स्थित मंदिर को तोड़कर किया गया था। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे और भूमि के स्वामित्व को स्वीकार नहीं करता। यह विवाद वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
13.37 एकड़ भूमि को लेकर भी विवाद
विवादित परिसर से जुड़ी करीब 13.37 एकड़ भूमि का इतिहास भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 1815 में बनारस के राजा पटनीमल द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी की नीलामी में यह जमीन खरीदे जाने का उल्लेख मिलता है। बाद में यह जमीन जुगल किशोर बिड़ला से जुड़ी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना हुई। वर्ष 1951 में भूमि ट्रस्ट में रखे जाने की बात सामने आती है।
वर्तमान में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह परिसर एक-दूसरे से सटे हुए हैं। उपलब्ध विवरणों के अनुसार शाही ईदगाह लगभग 2.5 एकड़ हिस्से में स्थित बताई जाती है। हिंदू पक्ष की ओर से भूमि पर अधिकार और ईदगाह हटाकर मंदिर के पुनर्स्थापन की मांग की जा रही है।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को लेकर विभिन्न वाद न्यायालयों में लंबित हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी मामले की सुनवाई चल रही है। वर्ष 2023 में हाई कोर्ट ने शाही ईदगाह परिसर के निरीक्षण के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने संबंधी आवेदन को स्वीकार किया था।
जुलाई 2026 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई 25 अगस्त तक टाल दी थी। उस समय पक्षकारों की ओर से बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मथुरा जिला न्यायालय में मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही है। हिंदू पक्ष की ओर से शाही ईदगाह हटाकर भूमि पर अधिकार और मंदिर पुनर्स्थापना की मांग वाले कई वाद दाखिल किए गए हैं।
शांतिपूर्ण आयोजन पर रहेगा जोर
बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा अपनी मांग को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से रखने के उद्देश्य से शोभायात्रा निकाली जा रही है। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन बनाए रखने और शांतिपूर्ण वातावरण में आयोजन संपन्न कराने पर विशेष जोर दिया गया।
जिला अध्यक्ष चंदन तिवारी ने कार्यकर्ताओं से संगठन के पदाधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर तैयारियां समय से पूरी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोभायात्रा को सफल बनाने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया जाएगा और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की जाएगी।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद
बैठक में संभाग प्रभारी मनोज श्रीवास्तव, जिला अध्यक्ष चंदन तिवारी, प्रदेश मंत्री संगीता मिश्रा, काशी एवं प्रयाग संभाग क्षेत्रीय अध्यक्ष किन्नर प्रकोष्ठ किरण नंद गिरी, विभिन्न जिलों से आए जिला अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, जिला उपाध्यक्ष चंदन जायसवाल, वरिष्ठ समाजसेवी राकेश श्रीवास्तव, संतोष मिश्रा, महानगर उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह, महानगर मंत्री राजेश सिंह और महानगर मंत्री नवीन प्रधान समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
