गाजीपुर
सिधौना की रामलीला में गूंजा बजरंगबली का जयकारासीता खोज और लंकादहन का हुआ भव्य मंचन, आज की लीला में अंगद रावण के दरबार में दिखाएंगे अपना पराक्रम
सिधौना, गाजीपुर। सिधौना रामलीला में रविवार को सीता खोज और लंकादहन की लीला का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों ने भगवान श्रीराम के प्रति हनुमान जी की अटूट भक्ति, अद्भुत साहस और पराक्रम का सजीव चित्रण कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला के दौरान पवनपुत्र हनुमान के समुद्र लांघने, अशोक वाटिका पहुंचने, माता सीता से भेंट करने और लंका दहन के प्रसंगों ने दर्शकों में विशेष उत्साह भर दिया। वहीं कार्यक्रम में आए इनकम टैक्स कमिश्नर गोपीनाथ चौबे तथा गोरखा प्रधान नरसिंह गोस्वामी का रामलीला अध्यक्ष संतोष मिश्रा ने माला अर्पण कर तथा अंग वस्त्र देकर स्वागत किया।
लीला के अनुसार, माता सीता की खोज में निकले हनुमान जी को जब वानर दल के सदस्यों ने उनकी शक्तियों का एहसास कराया, तो उन्होंने विशाल समुद्र को पार करने का संकल्प लिया। सौ योजन के समुद्र को लांघने के दौरान उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन अपने साहस, बुद्धि और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास के बल पर उन्होंने सभी बाधाओं को पार कर लिया और लंका पहुंच गए।
लंका में अशोक वाटिका पहुंचकर हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्रीराम की अंगूठी दिखाकर उनके संदेश से अवगत कराया। इससे माता सीता को प्रभु श्रीराम के आने की आशा बंधी। इसके बाद हनुमान जी ने माता सीता से फल खाने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने पर उन्होंने वाटिका के फल खाए और देखते ही देखते वाटिका को उजाड़ दिया। इस दौरान राक्षसों के साथ उनका भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें हनुमान जी ने कई राक्षसों को परास्त किया।
वाटिका के उजड़ने और राक्षसों के मारे जाने की सूचना मिलने पर रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को हनुमान जी को पकड़कर लाने का आदेश दिया। इसके बाद हनुमान जी और राक्षसों के बीच युद्ध का रोमांचक मंचन हुआ। अंततः हनुमान जी ने लंका में आग लगाकर सोने की नगरी को जला दिया। लंकादहन के दृश्य के दौरान दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।
वहीं, लीला में रावण द्वारा माता सीता को प्रलोभन देने और उन्हें प्रताड़ित करने के प्रसंग का भी मंचन किया गया। अंत में हनुमान जी माता सीता का संदेश लेकर भगवान श्रीराम के पास लौटने के लिए प्रस्थान करते हैं।
आज होगा अंगद-रावण संवाद
सिधौना रामलीला में आज अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन किया जाएगा। इस प्रसंग में भगवान श्रीराम के दूत बनकर अंगद रावण के दरबार में पहुंचेंगे और माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाकर युद्ध टालने का संदेश देंगे। रावण और अंगद के बीच होने वाला संवाद, अंगद का निर्भीक अंदाज और रावण के दरबार में उनके पराक्रम का प्रदर्शन दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।
रामलीला के ये प्रसंग भक्ति, साहस, मर्यादा और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देते हैं।
