गाजीपुर
हथियाराम सिद्धपीठ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रकट हुई अग्नि, बुढ़िया माई के जयकारों से गूंजा परिसर
महामंडलेश्वर बालकृष्ण यति महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ निशा रात्रि अनुष्ठान, दशहरा पर महाप्रसाद और भस्म पाने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
जखनिया, गाजीपुर। जखनिया स्थित प्राचीन हथियाराम सिद्धपीठ में निशा रात्रि के पावन अवसर पर आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सिद्धपीठ के पीठासीन महामंडलेश्वर बालकृष्ण यति महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि प्रकट करने का विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस दौरान संत-महात्माओं, विद्वानों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
पारंपरिक विधि से प्रकट की गई अग्नि
अनुष्ठान के दौरान काशी से आए विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों के साथ धार्मिक विधि-विधान संपन्न कराया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लकड़ी और रूई का पारंपरिक विधि से घर्षण कर अग्नि प्रकट करना रहा। जैसे ही अग्नि प्रकट हुई, महामंडलेश्वर बालकृष्ण यति महाराज के उद्घोष के साथ पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु इस प्राचीन धार्मिक परंपरा को श्रद्धाभाव से निहारते रहे।

गुरु-शिष्य परंपरा का हुआ उल्लेख
इस अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर भी प्रकाश डाला गया। वर्ष 2025 में जूना अखाड़े के पूज्य गुरु भवानी नंदन यति महाराज द्वारा इलाहाबाद कुंभ मेले में बालकृष्ण यति महाराज को महामंडलेश्वर पद पर प्रतिष्ठित किए जाने के प्रसंग का उल्लेख किया गया। इससे आयोजन में गुरु परंपरा के प्रति सम्मान और धार्मिक गरिमा का भाव देखने को मिला।
श्री बालकृष्ण यति कन्या डिग्री कॉलेज के प्राचार्य रत्नाकर महाराज ने भी अग्नि प्रकट करने की पारंपरिक प्रक्रिया में सहभागिता की। संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं की सामूहिक उपस्थिति ने अनुष्ठान को विशेष बना दिया।
बुढ़िया माई के जयकारों से गूंजा सिद्धपीठ परिसर
अग्नि प्रकट होते ही श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ मां बुढ़िया माई के जयकारे लगाए। देर रात तक चले इस धार्मिक आयोजन में भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-शांति और कल्याण की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच सिद्धपीठ का वातावरण भक्तिरस से सराबोर रहा।
दशहरा पर महाप्रसाद और भस्म पाने के लिए जुटते हैं श्रद्धालु
श्रद्धालुओं में प्रसाद और भस्म के प्रति विशेष आस्था
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, हथियाराम सिद्धपीठ में आयोजित अनुष्ठान के हवन कुंड की भस्म को श्रद्धालु सुख-शांति की कामना के साथ अपने घर ले जाते हैं। मान्यता है कि दशहरा के दिन मिलने वाला महाप्रसाद और अनुष्ठान की भस्म विशेष महत्व रखते हैं। इसी आस्था के चलते दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु सिद्धपीठ पहुंचते हैं।
बताया जाता है कि दशहरा के अवसर पर महाप्रसाद प्राप्त करने के लिए भक्त लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। श्रद्धालुओं की यह आस्था हथियाराम सिद्धपीठ की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा को विशेष पहचान देती है।
हथियाराम सिद्धपीठ में आयोजित निशा रात्रि अनुष्ठान ने एक बार फिर सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को प्रदर्शित किया। मां बुढ़िया माई के जयकारों के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में भक्तों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ भाग लिया।
