गोरखपुर
बिना नोटिस छह हजार से अधिक उपभोक्ताओं का बढ़ाया गया विद्युत भार, सब्सिडी पर संकट की आशंका
गोरखपुर। गोला विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगे छह हजार से अधिक बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत भार बिना पूर्व सूचना बढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। विभाग की ओर से उपभोक्ताओं के मोबाइल पर संदेश भेजकर जानकारी दी जा रही है कि उनका एक किलोवाट का कनेक्शन बढ़ाकर दो किलोवाट कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद उपभोक्ताओं में नाराजगी और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना किसी नोटिस या सहमति के स्वीकृत भार बढ़ा दिया गया है, जिससे सरकार द्वारा कम भार वाले घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली सस्ती बिजली और सब्सिडी प्रभावित हो सकती है। साथ ही बिजली बिल बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान जिन उपभोक्ताओं ने अपने स्वीकृत भार से अधिक बिजली का उपयोग किया, उनके स्मार्ट मीटर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रणाली ने स्वचालित रूप से उनका लोड बढ़ा दिया। गोला विद्युत उपकेंद्र के उपखंड अधिकारी रमेश ने बताया कि यदि एक किलोवाट के कनेक्शन वाले उपभोक्ता द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक बिजली का उपयोग किया जाता है तो सिस्टम के माध्यम से उसका स्वीकृत भार दो किलोवाट कर दिया जाता है।
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि भविष्य में यदि बिजली की खपत कम हो जाए, जैसे सर्दियों के मौसम में, तो क्या स्वीकृत भार स्वतः एक किलोवाट किया जाएगा, इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग को इस प्रक्रिया से संबंधित नियम, भार बढ़ाने के मानक, अपील की व्यवस्था और भार कम कराने की प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बढ़े हुए विद्युत भार का बिजली बिल और सरकारी सब्सिडी पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
वरिष्ठ पत्रकार एवं विद्युत उपभोक्ता बृजनाथ तिवारी, निवासी रानीपुर ने बताया कि बिना किसी आवेदन के उनके मोबाइल पर संदेश आया कि उनका कनेक्शन दो किलोवाट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे बिजली बिल बढ़ने की चिंता है।
वहीं दिवाकर राय ने कहा कि स्मार्ट मीटर के आधार पर स्वीकृत भार बढ़ाने की प्रक्रिया ने हजारों उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मांग की कि विद्युत विभाग इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि उपभोक्ताओं के बीच व्याप्त भ्रम दूर हो सके और उन्हें अपने अधिकारों तथा उपलब्ध विकल्पों की पूरी जानकारी मिल सके।
