वाराणसी
निजी अस्पतालों में अधिक प्रसव कराने पर आशा कार्यकर्ताओं से मांगा स्पष्टीकरण
सीएचसी करण्डा के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने जारी किया नोटिस
गाजीपुर। नंदगंज क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) करण्डा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. ए.के. रावत ने कई आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। मामला सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की तुलना में निजी अस्पतालों में अधिक प्रसव कराए जाने से जुड़ा है।
जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा में सामने आया मामला
3 जून को जारी पत्र के अनुसार, जिला स्वास्थ्य समिति की मई 2026 की बैठक में जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के संस्थागत प्रसवों की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि कुछ आशा कार्यकर्ताओं के कार्यक्षेत्र में सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा अधिक प्रसव निजी अस्पतालों में कराए गए हैं।
इन आशा कार्यकर्ताओं से मांगा गया जवाब
नोटिस प्राप्त करने वाली आशा कार्यकर्ताओं में डोमिनी देवी (सहेड़ी), इंद्रकला यादव (सराय मोहम्मदपुर), उमरावती देवी (माहेपुर), गुड़िया देवी (नवापुरा सहेड़ी), सुरमिला देवी (कुसम्हीकलां), उर्मिला देवी (सुआपुर), सीमा देवी (परमेठ) और रेखा देवी (बड़सरा) शामिल हैं।
माहेपुर की आशा कार्यकर्ता पर विशेष सवाल
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, माहेपुर क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता उमरावती देवी के क्षेत्र में दर्ज सभी नौ प्रसव निजी अस्पतालों में कराए गए, जबकि एक भी प्रसव सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में नहीं हुआ। इसे लेकर विभाग ने विशेष रूप से स्पष्टीकरण मांगा है।
संतोषजनक जवाब न मिलने पर होगी कार्रवाई
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. रावत ने संबंधित आशा कार्यकर्ताओं से पूछा है कि किन परिस्थितियों में गर्भवती महिलाओं का प्रसव सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के बजाय निजी अस्पतालों में कराया गया। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनका नाम आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला स्वास्थ्य समिति को भेज दिया जाएगा।
जननी सुरक्षा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।
