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चन्दौली

काशीराम आवासों की बदहाल स्थिति, मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर लोग

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पानी, सफाई और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भटक रहे आवासीय परिवार
चुनाव के समय वादे, जीत के बाद जनप्रतिनिधियों से नहीं होता संपर्क : स्थानीय निवासी

मुगलसराय (चंदौली)। नगर क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में काशीराम आवास योजना के अंतर्गत बनाए गए आवासों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। आवासीय परिसर में रहने वाले लोगों का आरोप है कि उन्हें पीने के स्वच्छ पानी, नाली-सफाई, सीवर व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ तक नहीं मिल पा रहा है। खराब बुनियादी सुविधाओं के कारण लोग नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर नालियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता हुआ लोगों के घरों तक पहुंच जाता है। इसके कारण गंदगी और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है।

पेंशन बंद होने से भीख मांगकर गुजर-बसर कर रही महिला

क्षेत्र की निवासी श्याम देई ने बताया कि वह दिनभर भीख मांगकर किसी तरह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें सरकारी पेंशन का लाभ मिलता था, लेकिन पिछले चार-पांच महीनों से पेंशन बंद हो गई है। इसके बाद आर्थिक संकट और गहरा गया है।

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उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कई अन्य महिलाएं भी ऐसी हैं जिन्हें वृद्धावस्था या विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई लोगों ने आवेदन भी किया है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

विधवा महिलाओं को नहीं मिल रही सरकारी सहायता

मनोहरपुर आवास में किराये पर रहने वाली एक महिला ने बताया कि उनके छह बेटियां हैं और लगभग एक वर्ष पूर्व उनके पति का निधन हो गया था। वह घर-घर जाकर खाना बनाने का कार्य कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं।

महिला का आरोप है कि उनका आवास स्वीकृत हो चुका था, लेकिन एक पूर्व सभासद द्वारा किसी कारणवश उसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे सुविधा शुल्क की मांग की गई थी और भुगतान न करने पर उनका आवास रद्द कर दिया गया।

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इसी आवासीय परिसर में रहने वाली अनवरी बेगम ने भी इसी प्रकार की समस्या बताते हुए कहा कि उनका आवास भी निरस्त कर दिया गया और उन्हें आज तक किसी सरकारी योजना या पेंशन का लाभ नहीं मिल सका है।

दिव्यांग बेटी के लिए प्रमाण पत्र तक नहीं बन पाया

मीना देवी ने बताया कि वह अपने आवास में रहती हैं, लेकिन उनकी दिव्यांग बेटी को अब तक किसी सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और वहां कर्मचारियों द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है।

श्याम दुलारी नामक महिला ने भी बताया कि उन्होंने विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक न तो कोई सूचना मिली और न ही किसी प्रकार का लाभ प्राप्त हुआ। उनका कहना है कि कार्यालयों में जाने पर पैसे की मांग की जाती है, जिसे गरीब लोग देने में सक्षम नहीं हैं।

पेयजल समस्या बरकरार, टंकी का निरीक्षण कर लौट गए अधिकारी

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स्थानीय निवासियों ने बताया कि कुछ समय पहले नगरपालिका के अधिकारी पानी की टंकी का निरीक्षण करने आए थे, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। परिणामस्वरूप क्षेत्र में पेयजल की समस्या आज भी बनी हुई है।

जनप्रतिनिधियों पर लगाया उपेक्षा का आरोप

क्षेत्रवासियों का कहना है कि चुनाव के समय विधायक, सभासद, नगर पालिका अध्यक्ष और अन्य जनप्रतिनिधि क्षेत्र में पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद कोई उनकी समस्याएं सुनने नहीं आता। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर वे अपनी समस्याएं किस अधिकारी और जनप्रतिनिधि के सामने रखें, ताकि उन्हें न्याय और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि काशीराम आवासों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर पेयजल, सफाई, सीवर व्यवस्था और लंबित पेंशन संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाए।

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