गाजीपुर
परिषदीय विद्यालयों में रोज एक कालांश होगा पुस्तक पठन
बच्चों में पढ़ने की आदत के साथ भाषा, समझ और अभिव्यक्ति कौशल विकसित करने की पहल
कहानी-कथन, पुस्तक चर्चा और पुस्तक समीक्षा जैसी गतिविधियों से विकसित होगी पठन संस्कृति
गाजीपुर, 18 अगस्त। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के पठन कौशल को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए अब दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों में प्रतिदिन एक कालांश पुस्तक पठन के लिए निर्धारित किया जाएगा। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ भाषा संबंधी दक्षता, समझ के साथ पढ़ने और अभिव्यक्ति कौशल को बेहतर बनाना है।
कक्षा और आयु के अनुरूप चुनी जाएंगी पुस्तकें
इस पहल के तहत विद्यार्थी विद्यालय के पुस्तकालय में उपलब्ध विभिन्न आयु एवं कक्षा स्तर के अनुरूप पुस्तकों का नियमित पठन करेंगे। शिक्षक बच्चों की रुचि और पठन स्तर के अनुसार पुस्तकों के चयन में सहयोग करेंगे। पुस्तक पढ़ने के बाद बच्चों से कहानी, पात्रों, घटनाओं और मुख्य विचार को लेकर चर्चा भी कराई जाएगी।

पठन के साथ रचनात्मक गतिविधियों पर जोर
प्रतिदिन पुस्तक पढ़ने के माध्यम से बच्चों के शब्द भंडार, उच्चारण, प्रवाह के साथ पढ़ने, पढ़कर समझने और प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। बच्चों को अपनी पसंद की पुस्तक चुनकर स्वतंत्र रूप से पढ़ने का अवसर भी मिलेगा।
पुस्तक पठन के कालांश को केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें कहानी-कथन, पुस्तक चर्चा, चित्र देखकर कहानी बनाना, नए शब्दों का प्रयोग, पुस्तक समीक्षा और सहपाठियों के साथ विचार साझा करने जैसी गतिविधियां भी शामिल की जाएंगी।
निपुण भारत मिशन के अनुरूप पहल
विभाग के अनुसार यह पहल निपुण भारत मिशन की भावना के अनुरूप बच्चों में बुनियादी भाषा कौशल और समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नियमित पठन अभ्यास से बच्चों में ‘समझ के साथ पढ़ने’ की क्षमता विकसित होगी, जो उनके आगे के शैक्षिक अधिगम की मजबूत आधारशिला बनेगी।
शिक्षक करेंगे पठन स्तर की निगरानी
विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए प्रतिदिन एक कालांश प्रभावी पठन गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाए। शिक्षक बच्चों के पठन स्तर में होने वाली प्रगति का लगातार अनुश्रवण करेंगे और आवश्यकता के अनुसार सहयोग प्रदान करेंगे।
इस पहल से परिषदीय विद्यालयों में ‘हर दिन पढ़ें, समझें और सीखें’ की संस्कृति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने और उनके पठन कौशल को अपेक्षित स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
