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गोरखपुर

एमएमएमयूटी के तीन शोधार्थियों को मिली अंतरराष्ट्रीय पोस्ट-डाक्टोरल फेलोशिप

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जर्मनी, इजरायल और चेक गणराज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों में करेंगे उन्नत शोध

कुलपति ने बताया विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति और वैज्ञानिक उत्कृष्टता का परिणाम

गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भौतिकी एवं पदार्थ विज्ञान विभाग के तीन शोधार्थियों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में पोस्ट-डाक्टोरल फेलोशिप प्राप्त हुई है। तीनों शोधार्थियों ने प्रो. डी.के. द्विवेदी के निर्देशन में पीएचडी पूरी की है। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है।

डॉ. प्रवीण कुमार सिंह को जर्मनी की प्रतिष्ठित हमबोल्ट फेलोशिप

डॉ. प्रवीण कुमार सिंह को अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फाउंडेशन की प्रतिष्ठित हमबोल्ट एक्सपीरियंस्ड रिसर्चर फेलोशिप प्रदान की गई है। इसके तहत वह रूर यूनिवर्सिटी बोखुम में प्रो. थॉमस अर्नेस्ट म्युलर के साथ ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर तकनीक पर शोध करेंगे। यह तकनीक घर्षण और कंपन जैसी यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने में सक्षम है, जिससे स्व-ऊर्जित उपकरणों और स्मार्ट सेंसरों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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डॉ. मयंक श्रीवास्तव करेंगे स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी पर शोध

डॉ. मयंक श्रीवास्तव कोएरियल यूनिवर्सिटी के रेडिकल रिएक्शन्स रिसर्च सेंटर में पोस्ट-डाक्टोरल फेलोशिप प्राप्त हुई है। वह सतह उत्प्रेरण और आधुनिक ऊर्जा प्रौद्योगिकी से जुड़े विषयों पर शोध करेंगे। उनके शोध से हरित हाइड्रोजन उत्पादन, कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोगी ईंधनों में रूपांतरण तथा स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विकास को नई दिशा मिलने की संभावना है।

डॉ. सुरभि अग्रवाल को चेक गणराज्य में शोध का अवसर

डॉ. सुरभि अग्रवाल को न्यूक्लियर फिजिक्स इंस्टीट्यूट के न्यूट्रॉन एंड आयन मेथड्स विभाग में पोस्ट-डाक्टोरल फेलोशिप मिली है। वह फेरोइक मल्टीफंक्शनैलिटीज विषय पर शोध करेंगी। यह क्षेत्र ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, उच्च क्षमता वाली मेमोरी प्रणालियों, स्मार्ट सेंसर और नई संचार तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुलपति ने दी बधाई

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विश्वविद्यालय की कुलपति अनुपमा कौशिक शर्मा ने तीनों शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, शोध निदेशक के मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय की विकसित हो रही उत्कृष्ट शोध संस्कृति का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त अनुभव देश के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा अन्य विद्यार्थियों को भी उच्च स्तरीय शोध के लिए प्रेरित करेगा।

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