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वाराणसी

अब बेटियां नहीं रहेंगी किसी पर निर्भर: स्कूटी प्रशिक्षण से मिल रही आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

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किशोरी समर कैंप में 15 बेटियां सीख रहीं स्कूटी, बढ़ रहा आत्मविश्वास और स्वावलंबन

मिर्जामुराद। महिलाओं और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आशा ट्रस्ट एवं लोक समिति द्वारा संचालित किशोरी समर कैंप में स्कूटी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इस पहल के तहत 15 बेटियां उत्साहपूर्वक स्कूटी चलाना सीख रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम बढ़ा रही हैं।

शिक्षा के साथ आत्मनिर्भरता का पाठ

प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य बेटियों को इस योग्य बनाना है कि वे अपनी शिक्षा, रोजगार और दैनिक जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर न रहें। प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को स्कूटी चलाने की बुनियादी तकनीक, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

बेटियों में दिख रहा जबरदस्त उत्साह

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प्रशिक्षण प्राप्त कर रही पुष्पांजलि, रेनू, साक्षी, कोमल, पायल, अंशिका, संध्या और शालू सहित अन्य छात्राओं में स्कूटी सीखने को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

छात्राओं का कहना है कि स्कूटी चलाना सीखना उनके लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे अपने कार्यों के लिए स्वयं आने-जाने में सक्षम महसूस कर रही हैं।

आत्मविश्वास और जिम्मेदारी का भी मिल रहा प्रशिक्षण

नंदलाल मास्टर ने बताया कि आज के समय में महिलाओं और बेटियों का आत्मनिर्भर होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ जीवनोपयोगी कौशल भी महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर में केवल वाहन चलाना ही नहीं सिखाया जा रहा, बल्कि बेटियों को आत्मविश्वास, अनुशासन और जिम्मेदारी का भी पाठ पढ़ाया जा रहा है।

सात दिनों तक चलेगा विशेष प्रशिक्षण

सात दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्राएं प्रतिदिन नियमित रूप से भाग लेकर नई-नई जानकारियां और कौशल सीख रही हैं। यह प्रशिक्षण उनके भविष्य में शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सहभागिता के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

सपनों को मिल रही नई दिशा

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यह पहल बेटियों को नए अवसर प्रदान करने के साथ-साथ उनके सपनों को नई उड़ान देने का कार्य कर रही है। स्कूटी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही ये बेटियां अब आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की ओर बढ़ रही हैं और समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही हैं।

कई लोगों का मिल रहा सहयोग

प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में आलोक, अरविंद, अनीश, मनीष, अनीता, सोनी, आशा राय, मनीषा, विद्या और अनुभव सहित कई लोग सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।

“जब बेटियां होंगी आत्मनिर्भर, तभी समाज होगा सशक्त”

स्कूटी प्रशिक्षण शिविर न केवल बेटियों को वाहन चलाना सिखा रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और सशक्त भविष्य की राह भी दिखा रहा है। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है।

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