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IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज, 2027 में चुनाव लड़ने की अटकलें

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13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा, पूर्वांचल में उनकी संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर चर्चाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। करीब 13 वर्ष की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा देने के बाद अब उनके अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरने की अटकलें जरूर तेज हो गई हैं।

लंदन की नौकरी छोड़कर चुनी थी आईएएस की राह

दिव्या मित्तल ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से शिक्षा हासिल करने के बाद लंदन में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम किया था। विदेश में बेहतर करियर के बावजूद उन्होंने भारत लौटकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया। प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान उनकी पहचान जमीनी स्तर पर काम करने वाली अधिकारी के रूप में बनी।

मिर्जापुर में काम से बनाई अलग पहचान

मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए दिव्या मित्तल ने ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई कार्य किए। हलिया ब्लॉक के लहुरियादह गांव में लंबे समय बाद नल से पेयजल पहुंचना उनके प्रमुख कार्यों में शामिल रहा। इस पहल के बाद उनकी कार्यशैली की काफी चर्चा हुई।

महिलाओं, किसानों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता तथा आम लोगों से सीधे संवाद की शैली ने भी उन्हें अलग पहचान दिलाई। यही वजह है कि प्रशासनिक सेवा से उनके अलग होने के बाद उनके अगले कदम को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है।

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देवरिया में भी रही प्रशासनिक छाप

दिव्या मित्तल ने देवरिया जिलाधिकारी के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। वहां प्रशासनिक सख्ती के साथ जनसरोकार से जुड़े कार्यों को लेकर उनकी चर्चा रही। पूर्वांचल के महत्वपूर्ण जिलों में काम करने के दौरान बनी पहचान को देखते हुए अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।

क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में उतरेंगी?

दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वह अब सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगी। राजनीतिक चर्चाओं में संभावना जताई जा रही है कि वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में किसी सीट से चुनाव लड़ सकती हैं।

हालांकि, अभी तक दिव्या मित्तल की ओर से किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या विधानसभा चुनाव लड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल चुनाव लड़ने की चर्चा को केवल राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

राजनीति में आईं तो बन सकती हैं अलग तरह का चेहरा

यदि भविष्य में दिव्या मित्तल सक्रिय राजनीति में प्रवेश करती हैं तो उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि, उच्च शिक्षा और शासन-प्रशासन के जमीनी अनुभव उन्हें राजनीति में एक अलग तरह का चेहरा बना सकते हैं। खासकर पूर्वांचल में उनके प्रशासनिक कार्यकाल और जनता के बीच बनी पहचान को देखते हुए उनकी संभावित राजनीतिक एंट्री को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

फिलहाल सभी की निगाहें दिव्या मित्तल के अगले कदम पर टिकी हैं। 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफा उनके करियर के एक अध्याय का अंत जरूर है, लेकिन क्या यह सक्रिय राजनीति के नए अध्याय की शुरुआत होगी? इसका जवाब आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

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