वाराणसी
BHU के वैज्ञानिकों का बड़ा शोध: सिंधी समुदाय का डीएनए 5000 साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में आनुवंशिक और सांस्कृतिक निरंतरता के अहम सबूत
113 नमूनों के जीनोम विश्लेषण में 60–66% डीएनए सिंधु घाटी से जुड़ा पाया गया
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वैज्ञानिकों ने सिंधी समुदाय की आनुवंशिक विरासत पर एक महत्वपूर्ण शोध किया है, जिसमें दावा किया गया है कि दुनिया भर में फैले सिंधी समुदाय का डीएनए आज भी लगभग 5000 वर्ष पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है।

यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका Human Genetics में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार सिंधी समुदाय न केवल सांस्कृतिक और भाषाई रूप से अपनी पहचान बनाए हुए है, बल्कि आनुवंशिक स्तर पर भी उसकी प्राचीन जड़ें आज तक सुरक्षित हैं।
113 लोगों के जीनोम का हुआ विस्तृत अध्ययन
शोध का नेतृत्व BHU की वैज्ञानिक चंचल देवनानी और प्रमुख जीन विज्ञानी ज्ञानेश्वर चौबे ने किया। अध्ययन में 113 सिंधी व्यक्तियों के जीनोम का विश्लेषण किया गया और लगभग 7.30 लाख डीएनए मार्कर्स की तुलना 2000 अन्य व्यक्तियों से की गई।

सिंधी समुदाय में मजबूत आनुवंशिक निरंतरता
शोध में पाया गया कि भारत और पाकिस्तान में बसे सिंधी समुदायों के बीच आनुवंशिक संरचना काफी हद तक समान है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह समुदाय “डायस्पोरा” का एक मजबूत उदाहरण है, जिसने प्रवास के बावजूद अपनी मूल पहचान बनाए रखी है।
60 से 66 प्रतिशत डीएनए सिंधु घाटी से मेल
अध्ययन में आधुनिक सिंधियों के डीएनए का 60 से 66 प्रतिशत हिस्सा प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े लोगों से मेल खाता पाया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मिश्रण लगभग 2500 से 2900 वर्ष पहले हुआ था।

संस्कृति में भी दिखी निरंतरता
शोध में सिंधी सांस्कृतिक प्रतीक ‘अज्रक’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसका पैटर्न हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो की पुरातात्विक खोजों से मिलता-जुलता पाया गया। इससे सांस्कृतिक निरंतरता के प्रमाण और मजबूत होते हैं।
भारत और पाकिस्तान के सिंधियों में अंतर
अध्ययन में यह भी पाया गया कि पाकिस्तान में सिंधियों में इनब्रीडिंग का स्तर अधिक है, जबकि भारत में बसे सिंधी समुदायों में विवाह संबंधों की विविधता के कारण आनुवंशिक विविधता अधिक है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन न केवल आनुवंशिकी बल्कि इतिहास और मानव प्रवास को समझने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
