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एक दशक पुराने दाभोलकर हत्याकांड में आया अदालत का फैसला

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पुणे। 20 अगस्त 2013 को महाराष्ट्र के पुणे में बाइक सवार दो हमलावरों ने सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। जिससे उनकी घटनास्थल पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। घटना के वक्त दाभोलकर सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए घर से निकले थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनपर पांच गोलियां चलाने की पुष्टि हुई थी।

पुणे की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में फैसला सुनाया। पांच आरोपी में से दो को दोषी करार दिया। वहीं, तीन को बरी कर दिया गया है। पुणे में CBI की स्पेशल कोर्ट के एडिशनल सेशन जज पीपी जाधव ने आरोपी सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर को दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बता दें, नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र में अंधविश्वास के खिलाफ आंदोलन चलाते थे, जिनकी 2013 में हत्या कर दी गई थी। हत्या के मामले को 2014 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ 2016 में आरोप पत्र दायर किया था। लेकिन इस मामले में फैसला आने में कुल 10 साल लग गए।

वहीं इस मामले में सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता चेतन राजहंस ने कहा कि, नरेंद्र दाभोलकर‌ हत्या के मामले में आज सनातन का निर्दोषत्व सिद्ध हो चुका है। सनातन धर्म को बदनाम करने का जो षड्यंत्र चल रहा था। वह अब एक प्रकार से ध्वस्त हो चुका है। ‌उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने हिंदुत्व पर सवाल खड़ा किया था लेकिन आज फैसला आने के बाद सभी की बोलती बंद हो गई है।

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