वाराणसी
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर काशी के मराठी समाज ने दी श्रद्धांजलि
सिगरा तिराहे स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पण, वक्ताओं ने तिलक के राष्ट्रवादी विचारों को किया याद
वाराणसी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर शनिवार को काशी के मराठी समाज ने सिगरा तिराहे स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का नेतृत्व वाराणसी नगर निगम के पार्षद संतोष सोलापुरकर ने किया। इस अवसर पर प्रतिमा स्थल पर स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा प्रतिमा का विधिवत स्नान और साफ-सफाई कर अंगवस्त्र ओढ़ाकर माल्यार्पण किया गया।
स्वराज के संदेश को किया याद
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने लोकमान्य तिलक के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” के उद्घोष से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उनके राष्ट्रवादी विचारों ने देशवासियों में आजादी के प्रति नई चेतना का संचार किया।
गणेश उत्सव और पत्रकारिता का किया उल्लेख
वक्ताओं ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत की। उन्होंने ‘केसरी’ (मराठी) और ‘मराठा’ (अंग्रेजी) समाचार पत्रों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत आधार प्रदान किया। साथ ही मांडले जेल में रहते हुए लिखी गई उनकी प्रसिद्ध कृति ‘गीता रहस्य’ का भी उल्लेख किया गया।
बड़ी संख्या में समाज के लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में यादव राव पाठक, गोविंद शिधोरे, साधना वेदांती, मकरंद महेस्कर, षडानन पाठक कारखेडकर, सुहास पटवर्धन, गजानन जोशी, प्रणव देशपांडे सहित मराठी समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
