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वाराणसी

सजा पाए डॉ. केके जैन की तबीयत बिगड़ी, बीएचयू में भर्ती

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जेल में सीने में दर्द की शिकायत के बाद कराया गया रेफर

वाराणसी। वर्ष 1997 के पुलिस हिरासत मृत्यु मामले में सजा पाए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके जैन की तबीयत जेल में अचानक बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें पुलिस अभिरक्षा में मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बीएचयू रेफर कर दिया गया। वर्तमान में उनका इलाज बीएचयू के हृदय रोग विभाग में चल रहा है।

गंभीर स्थिति को देखते हुए बीएचयू भेजा गया

सूत्रों के अनुसार जेल पहुंचने के कुछ दिनों बाद डॉ. जैन को सीने में दर्द और बेचैनी महसूस हुई। हालत गंभीर होने पर उन्हें तत्काल मंडलीय अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद बेहतर उपचार के लिए बीएचयू भेजने का निर्णय लिया।

1997 के चर्चित मामले में हुई थी सजा

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डॉ. केके जैन मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत रहे हैं। वर्ष 1997 में पुलिस हिरासत में हुई एक मौत के मामले में उनके द्वारा की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर मृतक के परिजनों ने सवाल उठाए थे और दोबारा जांच की मांग की थी।

जांच के बाद सामने आए थे रिपोर्ट में अंतर

बाद की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंतर पाए जाने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। अदालत ने इस मामले में तत्कालीन दो दरोगाओं को 10-10 वर्ष तथा पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. केके जैन को पांच वर्ष की सजा सुनाई थी।

पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं डॉ. जैन

चिकित्सकों के अनुसार डॉ. जैन प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इसके अलावा उनके हृदय में स्टेंट भी लगाया जा चुका है, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

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विशेषज्ञों की निगरानी में चल रहा उपचार

मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि मरीज को बेहतर इलाज के लिए बीएचयू रेफर किया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

पुलिस अभिरक्षा में जारी है इलाज

न्यायिक हिरासत में होने के कारण डॉ. जैन का उपचार पुलिस निगरानी में किया जा रहा है। बीएचयू अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मामला फिर चर्चा में

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डॉ. जैन की तबीयत बिगड़ने के बाद वर्ष 1997 का यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मेडिकल और कानूनी हलकों में मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर निगाहें बनी हुई हैं।

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