वाराणसी
राहुल गांधी के खिलाफ निगरानी याचिका पर सुनवाई पूरी, 10 जून को आएगा आदेश
भगवान श्रीराम पर कथित टिप्पणी को लेकर दायर पुनरीक्षण याचिका पर हुई सुनवाई
विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) की अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
वाराणसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ लंबित निगरानी याचिका पर सोमवार को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुर्वेद विक्रम सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में आदेश सुरक्षित रखते हुए 10 जून की तिथि निर्धारित की है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी में दिए गए संबोधन से जुड़ा मामला
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने भगवान श्रीराम को काल्पनिक पात्र बताया था। इस टिप्पणी को लेकर अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।
निचली अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने 27 मई 2025 को प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। इसके बाद अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने उक्त आदेश के विरुद्ध जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
एमपी-एमएलए अदालत को स्थानांतरित हुआ मामला
राहुल गांधी सांसद होने के कारण जिला जज ने मामले की सुनवाई के लिए याचिका को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) की अदालत में स्थानांतरित कर दिया। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से कोई अधिवक्ता या प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
दोनों पक्षों की दलीलें हुईं पूरी
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी विनय कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता हरिशंकर पांडेय की ओर से अधिवक्ता अलग नारायण राय ने बहस की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
याचिका में लगाए गए हैं ये आरोप
12 मई 2025 को दायर परिवाद में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा सनातन धर्म के प्रतीकों एवं धार्मिक आस्थाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती रही हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि ब्राउन यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी द्वारा भगवान श्रीराम को काल्पनिक पात्र बताए जाने से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
10 जून को होगा अगला फैसला
मामले में अब विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) की अदालत 10 जून को अपना आदेश सुनाएगी। इस फैसले पर दोनों पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं।
