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वाराणसी

सीएचसी-पीएचसी के प्रभारियों ने टीबी मरीजों को लिया गोद

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राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की सीएमओ ने की समीक्षा

टीबी नोटिफिकेशन बढ़ाने व निजी लैब को सम्पूर्ण जानकारी देने के दिए निर्देश

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रिपोर्ट – मनोकामना सिंह

वाराणसी| प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनपद में टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके पोषण व स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है । इस क्रम में शहरी व ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षकों और प्रभारियों ने टीबी मरीजों को गोद लेने की पहल की है ।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सोमवार को सीएमओ डॉ संदीप चौधरी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में बताया गया कि शहर व ब्लॉक स्तरीय सभी स्वास्थ्य केन्द्रों के अधीक्षकों और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों ने 5-5 टीबी मरीजों को गोद लेने की पहल की है। कुल 42 चिकित्सा अधिकारियों ने 210 टीबी मरीजों को गोद लिया है। इससे गोद लिए गए मरीजों को चिकित्सीय सुविधा, पोषण और भावनात्मक सहयोग नियमित रूप से मिलता रहेगा। सीएमओ ने टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन पर भी जोर दिया। सरकारी और निजी संस्थानों में टीबी नोटिफिकेशन के अंतर दूर करें और लक्ष्य के सापेक्ष शत- प्रतिशत नोटिफिकेशन करने के लिए निर्देशित किया। नामचीन निजी लैब से भेजे रहे टीबी मरीजों की सम्पूर्ण जानकारी दें। इससे उनकी पहचान कर वाराणसी में ही नोटिफिकेशन कर तत्काल उपचार शुरू किया जा सके। इसके लिए सीएमओ ने समस्त निजी लैब से पत्राचार के माध्यम से कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया। निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी मरीजों को उपचार के दौरान मिलने वाले हर माह 500 रुपये को लेकर डीबीटी की पहली किस्त का शत-प्रतिशत धनराशि उनके खाते में स्थानांतरित करें जो कि वर्तमान में 92 प्रतिशत है। साथ ही नई किस्त प्राप्त होते ही सभी लाभार्थियों, नोटिफिकेशन करने वाले चिकित्सकों आदि के खाते में तत्काल प्रभाव से शत-प्रतिशत खाते में स्थानांतरित कराना सुनिश्चित करें।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ पीयूष राय ने बताया कि जनपद के सभी टीबी मरीजों को गोद लेने का कार्य तेजी से चल रहा है । इस कार्य में पहले से ही स्वयं सेवी संस्थाएं, जन प्रतिनिधि, उच्चाधिकारी व अन्य लोगों द्वारा करीब 5000 टीबी मरीजों को गोद लिया जा चुका है । अब निजी चिकित्सकों को भी टीबी मरीजों के गोद लेने के बारे में प्रेरित किया जा रहा है, जल्द ही निजी चिकित्सालय भी टीबी मरीजों को गोद लेकर उनकी देखभाल करेंगे।

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